“स्वारथ लागी करहीं सब प्रीती”

उमा राम सम हित जग माहीं, गुरु पितु मातु बंधु प्रभु नाहीं।
सुर नर मुनि सब कै यह रीती, स्वारथ लागि करहिं सब प्रीती॥”

महादेव ने ये बात जब मां पार्वती से कही होगी, तब से आज में बड़ा अंतर आ गया है। समय, काल बदल गया है और सत्ता भी बदल गई है। देश की राजनीती में “स्वारथ…” वाली बात बस कांग्रेस पार्टी के ही इर्दगिर्द घूमती है, क्योंकि देश में व्याप्त भ्रष्टाचार से लेकर हर दुर्व्यवस्था के लिए वही जिम्मेदार है। स्थिति यह है कि सत्ता में होते हुए तो कांग्रेस ने देश और यहां के बहुसंख्यकों को नुकसान पहुंचाया ही, सत्ता विहीन होकर भी प्रभु श्रीराम के मंदिर निर्माण में बाधा बनी हुई है।
खैर, भला हो “कबीरा” का जो दिन-रात बाजार में खड़ा बिना किसी स्वारथ के देश के हर वर्ग की भलाई चाहता है। रामराज्य की कल्पना ऐसी साकार हुई है कि इक्का-दुक्का समाचार पत्र और न्यूज चैनल को छोड़कर हर जगह केंद्र सरकार का गुणगान किया जा रहा है। हालांकि, रामराज्य की यह सुंदर परिकल्पना कुछ लोगों के गले के नीचे नहीं उतर रही और वे “कबीरा” की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि वे सिर्फ तथाकथित अमीरों का भला चाहते हैं और उनकी जेब भरने के लिए ही नोटबंदी से लेकर राफेल तक का खेल खेल गया। अब भला, उन्हें कौन समझाए कि “कबीरा” ने अपने ज्यादातर वादे पूरे कर दिए, उनमें से कुछ कागजों, टीवी चैनलों, अखबारों, सोशल मीडिया पर देखे जा सकते हैं। जबकि कालाधन वापसी की गवाह तो स्वयं आम जन है। चूक बस इतनी हुई कि नोटबंदी की घोषणा करते समय “कबीरा” को भी कहां ज्ञात था कि सबसे ज्यादा कालाधन गृहणियों ने जमा कर रखा है। देश को धर्म के नाम पर बांटने का आरोप भी सर्वथा गलत है, क्योंकि नोट बदलने के लिए पूरा देश एक ही पंक्ति में खड़ा था। इतना ही नहीं देश की सेहत सुधारने में जीएसटी का बड़ा योगदान रहा। अब रेस्तरां में खाना खाने पर भोजन के अलावा आप कई और तरह के बिल चुकाते हैं, जिससे यदि आप आम जन में शुमार हैं, तो बाहर भोजन करने की मोहमाया पूरी तरह नहीं भी त्याग सके, तो थोड़ी तो सीमित कर ही लेंगे। पेट्रोल-डीजल की चर्चा करें, तो आप यदि वाहन चलाना कम कर दें, तो प्रदूषण अपने आप कम हो जाएगा। विकास के साथ ही स्वास्थ्य से लेकर साफ-सफाई तक चिंता करने वाले “कबीरा” की नीयत पर संदेह करने और सवाल उठाने की बजाय कांग्रेस को अपने भीतर झांकना चाहिए। और अगली बार आपको भी जब यह चौपाई याद आए, तो एक बार विचारिए जरूर कि यह सब पर फिट नहीं बैठती, क्योंकि एक ‛कबीरा’ है, जो बिना किसी स्वारथ के दिन-रात लोगों का भला चाह रहा है। (चित्र साभार)
सोनी सिंह

Post Author: Soni

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