श्राप के कारण शिव को काटना पड़ा था गणपति का सिर

गणेशोत्सव विशेष

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान भोलेनाथ ने अपने पुत्र गणेश का सिर त्रिशूल से काट दिया था। मगर, क्या आप जानते हैं कि ऐसा करने की स्थिति क्यों बनी थी? तो, इसके पीछे एक श्राप था, जिसकी वजह से भोलेनाथ को यह पीड़ा उठानी पड़ी-
माली और सुमाली नामक दो राक्षस के पापों के कारण सूर्य देव उनका वध करने वाले थे। माली-सुमाली ने भगवान शिव से प्रार्थना की और भोलेनाथ ने उनकी रक्षा के लिए सूर्य पर अपने त्रिशूल से प्रहार कर दिया। त्रिशूल की चोट से सूर्य की चेतना नष्ट हो गई और वह तुरंत रथ से नीचे गिर पड़े। इससे दुनिया में अंधेरा छा गया। उधर, जब कश्यपजी ने अपने पुत्र सूर्य को मरणासन्न अवस्था में देखा, तो वे सूर्य को छाती से लगाकर फूट-फूटकर विलाप करने लगे।
सारे देवताओं में हाहाकार मच गया। सभी भयभीत हो गए। और ब्रह्मा के पौत्र तपस्वी कश्यपजी ने शिवजी को नाराज होकर श्राप दे दिया, “आज जैसे तुम्हारे त्रिशूल के प्रहार के कारण मेरे पुत्र का हाल हुआ है। ठीक वैसे ही तुम्हारे पुत्र पर भी होगा। तुम स्वयं अपने ही पुत्र का मस्तक काट दोगे।” इसी श्राप के कारण ऐसे संयोग बने कि भगवान भोलेनाथ को अपने पुत्र गणेश का सिर काटना पड़ा।

Post Author: Soni

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