सत्यम्-शिवम्- सुंदरम्

जीवन में सत्य, शिव और सुंदर के थोड़े से बीज बोओ। यह मत सोचना कि बीज थोड़े से हैं, तो उनसे क्या होगा! क्योंकि एक बीज अपने में हजारों बीज छुपाए हुए है…

सदा स्मरण रखना कि एक बीज से पूरा उपवन पैदा हो सकता है। आज किसी ने कहा है, ”मैंने बहुत थोड़ा समय देकर ही बहुत कुछ जाना है। थोड़े से क्षण मन की मुक्ति के लिए दिए और अलौकिक स्वतंत्रता का अनुभव किया। फूलों, झरनों और चांद-तारों के सौंदर्य-अनुभव में थोड़े-से क्षण बिताये और न केवल सौंदर्य को जाना, बल्कि स्वयं को सुंदर होता हुआ भी अनुभव किया। शुभ के लिए थोड़े-से क्षण दिए और जो आनंद पाया, उसे कहना कठिन है। तब से मैं कहने लगा कि प्रभु को तो सहज ही पाया जा सकता है। लेकिन हम उसकी ओर कुछ भी कदम न उठाने के लिए तैयार हों, तो दुर्भाग्य ही है।”

”स्वयं की शक्ति और समय का थोड़ा अंश सत्य के लिए, शांति के लिए, सौंदर्य के लिए, शुभ के लिए दो और फिर तुम देखोगे कि जीवन की ऊंचाइयां तुम्हारे निकट आती जा रही हैं। और, एक बिलकुल अभिनव जगत अपने द्वार खोल रहा है, जिसमें कि बहुत आध्यात्मिक शक्तियां अंतर्गर्भित हैं। सत्य और शांति की जो आकांक्षा करता है, वह क्रमश: पाता है कि सत्य और शांति उसके होते जा रही हैं। और, जो सौंदर्य और शुभ की ओर अनुप्रेरित होता है, वह पाता है कि उनका जन्म स्वयं उसके ही भीतर हो रहा है।”

सुबह उठकर आकांक्षा करो कि आज का दिवस सत्य, शिव और सुंदर की दिशा में कोई फल ला सके। और, रात्रि देखो कि कल से तुम जीवन की ऊंचाइयों के ज्यादा निकट हुए हो या नहीं। गहरी आकांक्षा स्वयं में गहरी आकांक्षा पैदा करता है।

■ (सौजन्य से : ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन)

Post Author: Soni

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