प्रसन्नता का भी कारण ढूंढ़े!!

यदि तुम अप्रसन्न हो, तो तुम्हारे पास अप्रसन्न होने का कारण है। यदि तुम प्रसन्न हो तो, तुम प्रसन्न होने का भी कारण तलाशते हो, क्योंकि तुम्हारा मन अकारण में विश्वास नहीं करता…

मन अकारण को नियंत्रित नहीं कर सकता। अकारण के साथ मन नपुसंक हो जाता है। इसी कारण मन यह या वह कारण ढूंढ़ता चला जाता है। लेकिन मैं तुम्हें कहना चाहता हूं कि जब कभी तुम प्रसन्न हो, तुम बिना किसी कारण के प्रसन्न हो, क्योंकि प्रसन्नता ऐसी चीज है जिससे तुम बने हो। हां! यदि तुम अप्रसन्न हो तो तुम्हारे पास कोई कारण होगा। क्योंकि सिर्फ प्रसन्नता तुम्हारी चेतना है, यह तुम्हारी आत्यंतिक वास्तविकता है।
आनंद तुम्हारा आत्यंतिक मर्म है। वृक्षों को देखो, पक्षियों को देखो, बादलों को देखो, तारों को देखो…और यदि तुम्हारे पास आंखें हैं, तो तुम यह देख पाने में सक्षम होओगे कि सारा अस्तित्व आनंद से भरा है। हर चीज बस प्रसन्न है। वृक्ष प्रसन्न हैं बिना किसी कारण के। फूलों को देखो वे भी खिले हैं-बिना किसी कारण के। बस यह अविश्वसनीय है कि फूल कितने प्रसन्न हैं। सारा अस्तित्व आनंद से बना है।
■ ओशो

Post Author: Soni

काशी पत्रिका के जरिए हमारी भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता को सजोने-संवारने का सतत् प्रयास।

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