वाद नहीं, संवाद करो…

संवाद का मतलब होता है कि दूसरे को खुले मन से समझने का प्रयास करना। संवाद बहुत ही दुर्लभ और सुंदर घटना है, क्योंकि उससे दोनों ही समृद्ध होते हैं। सत्य तक पहुंचने के लिए, एक-दूसरे का हाथ थाम लेना, राह ढूंढ़ने में एक-दूसरे की मदद करना संवाद है…

सच तो यह है कि जब तुम बोल रहे हो, या तो यह बहस हो सकती है, शाब्दिक झगड़ा। मैं ठीक और तुम गलत यह सिद्ध करने का प्रयास या संवाद। सत्य तक पहुंचने के लिए, एक-दूसरे का हाथ थाम लेना, राह ढूंढ़ने में एक-दूसरे की मदद करना संवाद है। यह साथ होना है, यह सहयोग है, सत्य को पाने के लिए यह लयबद्ध प्रयास है। यह किसी तरह से झगड़ा नहीं है, किसी हालत में नहीं।
यह मित्रता है, सत्य पाने के लिए साथ-साथ चलना, सत्य पाने में एक-दूसरे की मदद करना। अभी किसी के पास सत्य नहीं है, लेकिन जब दो लोग ढूंढ़ने का प्रयास करते हैं, सत्य के बारे में एक साथ खोजने लगते हैं, यह संवाद है और दोनों ही समृद्ध होते हैं। और जब सत्य मिलता है, तब वह ना तो मेरा होता है, न ही तुम्हारा। जब सत्य पाया जाता है, यह हम दोनों से बड़ा है, जिन्होंने खोजने में सहभागिता की, यह दोनों से बड़ा है, यह दोनों को घेर लेता है और दोनों समृद्ध हो जाते हैं।
■ ओशो

Post Author: Soni

काशी पत्रिका के जरिए हमारी भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता को सजोने-संवारने का सतत् प्रयास।

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