महाशिवरात्रि : हर-हर बोल रहा है काशी

युग-युगांतर से भगवान भोलेनाथ की परमप्रिय काशी की थाती है महाशिवरात्रि। जी हां, यूं तो समूचा विश्व महाशिवरात्रि मनाता है, पर काशी की शिवरात्रि काशी के वासी बाबा विश्वनाथ को बेहद प्रिय है। अघोरी शिवगणों की बारात में दूल्हा बने विश्वनाथजी भस्म-भभूत से नहाए पथ पर बड़ी शान से देवी पार्वती का वरण करने निकलते हैं। माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन सभी लोकों के देवी-देवता काशी दर्शन को आते हैं और वर-वधु (शिव-पार्वती) को शुभकामनाएं देने हैं। बाबा विश्वनाथ के दरबार में रात-भर पूजा-अर्चना, साधना-आराधना के बीच शिव-पार्वती का विवाह संपन्न होता है। फाल्गुन मास में पड़ने वाली महाशिवरात्रि इस बार आज यानी 4 मार्च को है। खास बात यह है कि इस महाशिवरात्रि को सोमवार भी है, जो भोले-भंडारी का ही दिन है। शिव-भक्‍तों के लिए महाशिवरात्रि बड़ी ही महत्‍वपूर्ण होती है। आज यानी सोमवार की शाम 04:28 बजे से महाशिवरात्रि आरंभ हो रही है। महाशिवरात्रि का व्रत नक्षत्र के हिसाब से मंगलवार, 5 मार्च 2019 को रखा जाएगा। इस बार महाशिवरात्रि पर अद्भुत संयोग बन रहा है और इस दिन व्रत रख कर शिवजी की अराधना करने से कई गुना ज्‍यादा पुण्‍य प्राप्‍त होगा। कहते हैं कि अगर श‍िवल‍िंग में शंकरजी का वास होता है, ऐसे में महाशिवरात्रि पर कुछ खास चीजें अर्पित की जाएं तो भगवान श‍िव से आसानी से मनचाहा वरदान पाया जा सकता है। 
महाशिवरात्रि का महत्‍वफाल्गुन मास के दिन आने वाली महाशिवरात्रि पर शिवजी और मां पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिये इस पर्व को महाशिवरात्रि कहते हैं। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में शिव-विवाह के लिए रानी भवानी मंदिर परिसर को जनवासे के लिए सजाया गया है। फाल्गुनी मस्ती में निकलने वाली शिव-बारात की भी तैयारियां हो चुकी हैं। बैलगाड़ी पर होंगे विश्वनाथजी और काशीवासी संग औघड़, भूत-प्रेत, मदारी और नागा साधु बाराती बनेंगे। 
काशी की महाशिवरात्रि सोमवार की भोर में मंगला आरती के बाद से लेकर 5 मार्च की रात शयन आरती तक लगातार बाबा का दरबार भक्तों के लिए खुला रहेगा। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए नियमित होने वाली सप्तर्षि, शृंगार और शयन आरती स्थगित की गई है। इसकी जगह गौरा संग विवाह बंधन में बंधने की रस्में महानिशा में रात 11 बजे से शुरू होने वाली चार प्रहर की आरती के साथ निभाई जाएगी। इस बार महाशिवरात्रि पर दारानगर के महामृत्युंजय मंदिर से निकलने वाली मुख्य शिव बारात आतंकवाद के खिलाफ और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देगी और मैदागिन, चौक दशाश्वमेध होते हुए विश्वनाथ मंदिर के डेढ़सी पुल द्वार तक जाएगी।

कैसे करें शिवजी की पूजामहाशिवरात्रि पर बनारस का हर शिवालय भक्तों की भीड़ और श्रद्धालुओं के ‘हर-हर महादेव’ से गुंजित रहता है। इस दिन शिवजी की पूजा पूरे विधि विधान से की जाती है। वैसे तो एक लोटा जल चढ़ाने से ही भगवान शिव अपने भक्तों की मुराद पूरी कर देते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार भगवान शिव पर पूजा करते वक्‍त बिल्वपत्र, शहद, दूध, दही, शक्कर और गंगाजल से जलाभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने भर से ही आपका बेड़ा पार हो जाएगा।

 ■ काशी पत्रिका

Post Author: kashipatrika

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