कहानियों के झरोखे से दीपावली

अमावश्या की अंधेरी-काली रात की तरह ही मनुष्य के मन में बुराई की कालिमा गहरे में जम जाती है। इस पर दीपक या अच्छाई रूपी रौशनी से विजय पाया जा सकता है। दिवाली मनाने की परंपरा कब और क्यों शुरू हुई, इससे संबंधित हर कहानी भी इसी ओर संकेत करती है। आइए काशी पत्रिका आज अपने सुधी पाठकों को छह कहानियों के माध्यम से यह बताने का प्रयास कर रही हैं कि दिवाली के त्यौहार की शुरुआत कब और कैसे हुई-

कहानी 1: प्रभु श्रीराम का स्वागत
दिवाली को लेकर सबसे प्रचलित कहानी यह है कि प्रभु श्रीराम जब चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे तो उनके आने की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। तभी से दीपावली मनाने की परंपरा चली आ रही है।

कहानी 2: पांडवों की घर वापसी
दिवाली से जुड़ी एक कहानी का संबंध महाभारत से है। कौरवों ने, शकुनी मामा की मदद से शतरंज के खेल में पांडवों का सबकुछ छीन कर उन्हें 13 वर्ष के लिए वन जाने को मजबूर कर दिया। कार्तिक अमावस्या को ही पांडव अपने राज्य लौटे थे। उनके लौटने के खुशी में उनके राज्य के लोगों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। इस तरह दीपावली मानाने की परंपरा चल पड़ी।

कहानी 3: राजा विक्रमादित्य का राज्याभिषेक
उदारता, साहस और अपनी विद्वता के लिए प्रसिद्ध राजा विक्रमादित्य प्राचीन भारत के एक महान सम्राट थे। कुछ लोगों का मानना है कि कार्तिक अमावस्या के दिन ही उनका राज्याभिषेक हुआ था।

कहानी 4:माता लक्ष्मी का अवतार
हर बार दीपावली का त्यौहार हिन्दी कैलंडर के अनुसार कार्तिक महीने के “अमावस्या” के दिन मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार इसी दिन समुन्द्र मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी ने सृष्टि में अवतार लिया था। माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है, इसलिए हर घर में दीप जलाकर देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं।

कहानी 5: छठवें सिख गुरु की आजादी
दिवाली का त्यौहार सिख समुदाय के लोग भी मनाते हैं। छठवें गुरु श्री हरगोविंद जी को मुगल सम्राट जहाँगीर ने ग्वालियर की जेल में कैद कर रखा था। उनकी आजादी को ही दिवाली के रूप में मानते हैं।

कहानी 6: श्रीकृष्ण से दिवाली का संबंध
दीपावली की शुरुआत से जुड़ी एक मान्यता का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से भी है। नरकासुर प्रागज्योतिषपुर(जो की आज दक्षिण नेपाल एक प्रान्त है) का राजा था। नरकासुर इतना क्रूर था कि उसने देवमाता अदिति के शानदार बालियां छीन ली थी। देवमाता अदिति श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा की सम्बन्धी थी। नरकासुर ने कुल सोलह भगवान की कन्याओं को बंधित करके रखा था। श्रीकृष्ण की मदद से सत्यभामा ने नरकासुर का वध किया और सभी देवी कन्याओं को उसकी कैद से छुड़ा लिया। यह भी दीपावली मनाने का एक मुख्य कारण माना जाता है।
■ काशी पत्रिका

Post Author: kashipatrika

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