काशी सत्संग: हंसना जरूरी है!

एक गांव में एक विदेशी यात्री आया। उस गांव के बारे में, उसने काफी कुछ सुन रखा था। उसने वहां काफी सुंदर जगह देखी। वहां के लोग विदेशी यात्रियों की काफी कुछ सहायता करते थे, लेकिन हर व्यक्ति पैसे की पीछे भागता था।
कोई भी व्यक्ति मनोरंजन के लिए कुछ भी नहीं करते। न ही वो हंसते, न ही लोगों से हास्य रस में बातचीत करते। यह देखकर विदेशी यात्री को दुख हुआ। उसने सोचा क्यों न इन्हें जीवन के आनंद लेने की कला सिखाई जाए। इस बात को ध्यान में रखते हुए उसने उस गांव में एक कला प्रदर्शनी लगवाई। दूर-दूर से लोग प्रदर्शनी देखने के लिए वहां पहुंचे।
उसने उस प्रदर्शनी में एक आईना भी लगवाया। सभी ग्रामीण उसमें अपने चेहरे को देखते और हंस-हंस कर लोटपोट हो जाते। प्रदर्शनी के आखिरी दिन उस विदेशी यात्री ने सभी को बुलाया। उसने सभी से पूछा-‘आपको प्रदर्शनी में क्या खास लगा?’ सभी ने लगभग एक समान ही उत्तर दिया। सभी ने कहा-‘वह पहली बार दिल खोलकर हंसा।’
तब उस विदेशी यात्री ने कहा, ‘मेहनत जीवन का अंग है। पैसा जरूरत, लेकिन हंसना जिंदगी का सबसे बड़ा महत्व। लगातार चलते रहने से आदमी टूट जाता है, इसलिए जीवन में मनोरंजन होना बहुत जरूरी है।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

काशी पत्रिका के जरिए हमारी भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता को सजोने-संवारने का सतत् प्रयास।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *