काशी सत्संग: सकारात्मक नजरिया

बात पुरानी है लेकिन है रोचक। एक बार एक मुनि तीर्थ यात्रा पर निकले, रास्ते में एक गांव आया। मुनि बहुत थक चुके थे। उन्होंने गांव में ही एक खेत के नजदीक बरगद के पेड़ के नीचे शरण ली। वहीं कुछ मजदूर पत्थर से खंभे बना रहे थे।
मुनि ने पूछा, ‘यह क्या बन रहा है?’ एक मजदूर ने कहा, ‘पत्थर काट रहा हूं।’ मुनि ने फिर पूछा, ‘वो तो दिखाई दे रहा है, लेकिन यहां बनेगा क्या?’ दूसरे मजदूर ने कहा,’ मालूम नहीं।’
मुनि आगे चल दिए। उन्हें एक और मजदूर मिला उन्होंने उससे भी यही पूछा, ‘यहां क्या बनेगा?’ किंतु, उस मजदूर ने भी निराशा से भरा उत्तर दिया। कुछ और आगे एक और मजदूर मिला, जब मुनि ने उससे भी वही प्रश्न दोहराया, तो उसने उत्तर दिया, ‘मुनिवर यहां मंदिर बनेगा। इस गांव में कोई बड़ा मंदिर नहीं था।’
गांव के लोगों को बाहर दूसरे गांव में त्योहार मनाने जाना पड़ता था। मैं अपने हुनर से यहां मंदिर बना रहा हूं। जब मैं पत्थरों पर छैनी चलाता हूं, तो मुझे मंदिर की घंटी की आवाज सुनाई देती है। मैं अपने इसी काम में मगन रहता हूं। मुनि उस मजदूर के इस नजरिए से अभिभूत हो गए और उसे आशीर्वाद दिया।
जीवन आप किस तरीके से जीते हैं, यह आपका रवैया तय करता है। काम को यदि आनंद के साथ किया जाए, तो हमेशा परमानंद की अनुभूति होती है।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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