काशी सत्संग: गौरैया का नववर्ष

सूरज की किरणें अभी ठीक से पंकज वन में आई भी नहीं थीं कि चारों ओर जश्न का माहौल-सा छा गया। सबसे पहले तो कलियां खिलखिलाकर खिल उठीं और फिर उन पर भौरों का झुंड मंडराने लगा।
कौए ने घोंसले से सिर निकालकर देखा। गौरेया सवेरे-सवेरे उड़ती हुई कहीं जा रही थी।
कौए ने आवाज लगाई, ‘बहन, सारे लोग नए वर्ष का स्वागत कर रहे हैं, तुम कहां जा रही हो? नए वर्ष की शुभकामनाएं तो लेती जाओ।’
‘तुम्हें भी नववर्ष की ढेर सारी शुभकामनाएं, भैया। मैं भी नए वर्ष का ही स्वागत करने जा रही हूं।’ गौरेया ने कहा।
रास्ते में चूहों का झुंड नए वर्ष को सेलिब्रेट कर रहा था। सभी चूहे मधुर संगीत पर कमर मटकाकर नाच रहे थे। गौरेया को तेजी से उड़ते हुए देख वे भी बोल पड़े, ‘गौरेया बहन, सवेरे-सवेरे कहां जा रही हो? आओ, हमारे साथ नए वर्ष का जश्न मनाओ।’
‘नहीं, आप लोगों के साथ मैं नहीं आ सकती, लेकिन मैं भी नए वर्ष की शुरुआत ही करने जा रही हूं।’ गौरेया बोली और उड़ चली।
कुछ ही दूरी पर भालुओं का झुंड भी नए वर्ष की खुशी में उछल-कूद कर रहा था। गौरेया को देखकर एक भालू चिल्लाया, ‘गौरेया, ओ गौरेया, क्या आज भी दाना चुगने की चिंता में उड़ी जा रही हो। क्या तुम्हें याद नहीं आज नया वर्ष है?’
‘याद है, भाई, याद है। मैं भी नए वर्ष की खुशी मनाने दूसरी जगह जा रही हूं।’ गौरेया बोलती हुई उड़ती रही।
शेर की गुफा के पास ढेर सारे जानवर नए वर्ष की धूमधाम से शुरुआत कर रहे थे। वहां कई तरह की मिठाइयां भी बन रही थीं। नाचने-गाने का इंतजाम भी था। बाजे-गाजे के साथ सभी झूम-झूमकर जश्न मना रहे थे।
गौरेया को देख शेर ने आवाज लगाई, ‘अरी गौरेया, सवेरे-सवेरे कहां जा रही हो? आओ यहां। हम सब नए वर्ष की शुरुआत अच्छे से करने के लिए इकट्ठा हुए हैं। तुम भी आओ।’
‘माफ कीजिए। मैं अपने नए वर्ष की शुरुआत किसी और चीज से करना चाहती हूं। आप सबको नए वर्ष की शुभकामनाएं।’ कहती हुई गौरेया उड़ गई।
‘क्यों न हम चलकर देख लें, गौरेया क्या कर रही है?’ बंदर ने राय दी और सब गौरेया के रास्ते चल पड़े।
‘अरे, यह क्या? यह गौरेया तो बड़ा अच्छा काम कर रही है। इस नन्ही चिड़िया की सोच तो देखो, कितनी अच्छी है।’ तारीफ करते हुए शेर का चेहरा खिल उठा।
सामने मैदान में गौरेया ढेर सारी चींटियों के झुंड को संबोधित कर रही थी, ‘बहनों, तुम में से कई चींटियां गरीबी के कारण पढ़ाई नहीं कर पातीं और स्कूल जाना बंद कर देती हैं। नए वर्ष पर मैंने संकल्प लिया है कि कुछ गरीब चींटियों की पढ़ाई के लिए मदद करूंगी। साथ ही अन्य चिड़ियों और जानवरों को भी प्रेरित करूंगी कि वे तुम्हारी आर्थिक मदद करें।’
यह सुनकर मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कई चींटियों की आंखों से खुशी के आंसू टपकने लगे।
आहट पाकर गौरेया जब मुड़ी, तो सब जानवरों को अपने पीछे आंखें फाड़े देखता पाया।
‘मैं कुछ गरीब चींटियों का भविष्य संवारकर नए वर्ष की शुरुआत करना चाहती थी, सो मैंने सवेरे से पहले यही काम किया। मैंने सोचा नए वर्ष की इससे अच्छी शुरुआत भला और क्या हो सकती है? गौरेया ने सफाई दी।
‘नन्ही-सी चिड़िया और सोच कितनी बड़ी है। इससे हमें भी कुछ सीखना चाहिए। कुछ क्या, हमें भी हंसने-गाने, बाजा बजाने, पकवान-मिठाई खाने से पहले किसी असहाय, लाचार, गरीब की मदद करने का काम जरूर करना चाहिए। अभी भी वक्त गुजरा नहीं है। चलो, आओ, सबके सब किसी मजबूर का भविष्य संवारने के लिए जुट जाओ। इस तरह हमारी भी नए वर्ष की शुरुआत अच्छी रहेगी।’ शेर ने सभी की ओर मुखातिब होकर कहा। सभी गौरेया की ओर खुशी से देख रहे थे।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

काशी पत्रिका के जरिए हमारी भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता को सजोने-संवारने का सतत् प्रयास।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *