काशी सत्संग : हरि प्रिय

पांडवों का जीवन कठिनाई से भरा रहा, पर उन्होंने कभी इसकी शिकायत श्रीकृष्ण से नहीं की, जो उनके परम स्नेही थे, निकट के संबंधी थे और उस पर पांडव ये भी जानते थे की श्रीकृष्ण परम् भगवान हैं। पांडवो को श्रीकृष्ण के प्रति अगाध श्रद्धा थी। उन्होंने हर स्थिति में कृष्ण पर अपना विश्वास बनाए रखा और उनकी शरण में हमेशा अपने आपको सुखी समझा चाहे स्थितियां कितनी भी विपरीत रही हो। जब युद्ध समाप्त हुआ और पांडवों को उनका राज्य मिल गया, तब कृष्ण वापस द्वारिका जाने लगे। यह सुनकर पांडवों की माता कुंती ने उनसे प्रार्थना की जो बड़ी अद्भुत है। उन्होंने भगवान से कहा कि हे गोविन्द! हमारी जिंदगी में हमेशा दुख ही दुख आये, ताकि आप हमेशा हमारे साथ रहें, क्योंकि आप दुख में हर पल हमारे साथ रहें, जबकि आज जब सुख का समय आया है, तो आप हमें छोड़ कर जा रहे हैं।
मित्रों, इस प्रसंग की चर्चा का तात्पर्य यही है कि दुखों से कभी घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि जैसे एक योग्य व्यक्ति को ही कठिन कार्य सौंपा जाता है, उसी तरह ईश्वर भी अपने प्रिय भक्त की ही परीक्षा लेते हैं।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

काशी पत्रिका के जरिए हमारी भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता को सजोने-संवारने का सतत् प्रयास।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *