काशी सत्संग: संदेह के पार…

एक व्यक्ति ने अपने गुरु से पूछा कि कोई किसी पर विश्वास को कैसे बनाएं? क्या यह कोई गुण है? गुरु ने कहा, “विश्वास को पैदा नहीं किया जा सकता। आप सरलता से अपने संदेहों के प्रति जागरूक होकर उन्हें छोड़ दें। जब आप अपने शक को छोड़ देंगे, तभी विश्वास उत्पन्न हो जाएगा। शक बादलों की तरह मन को घेर लेता है। जागो और महसूस करो। यदि आप संदेह को आने से रोक देंगे, तब आप जाग जाएंगे और जब आप जागेंगे, तो देखेंगे कि विश्वास यहां पहले से ही है।
गुरु ने फिर कहा कि विश्वास को बनाया नहीं जा सकता, लेकिन संदेह को दूर किया जा सकता है। संदेह की सफाई देने से वह दूर नहीं होता। तुम संदेहों की सफाई मत दो, जब एक संदेह की सफाई दोगे तो दस और उठ खड़े होंगे। बस इतनी जागरुकता रखो कि संदेह को छोड़ दो। जब तुम इन संदेहों को छोड़ दोगे तो ऐसे स्थान पर पहुंच जाओगे जहां गहराई में ताकत, सच्चाई और धैर्य हैं। यही विश्वास है।
आपने इस बात का अनुभव किया होगा कि जब भी आप शक करते हैं, तब आप कमजोर महसूस करते हैं। जब आप विश्वास करते हैं तब आप शक्तिशाली महसूस करते हैं। अंदर से मजबूत, तो यह आपकी पसंद है कि आपको कमजोर महसूस करना है या शक्तिशाली। अच्छी बात पर ही शक होता है, कभी भी नकारात्मक या बुरी बात पर शक नहीं होता। क्या यह थोड़ी सी जागरुकता काफी नहीं है, शक को दूर भगाने के लिए। अब शिष्य को अपने सवाल का उचित जवाब मिल चुका था।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

काशी पत्रिका के जरिए हमारी भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता को सजोने-संवारने का सतत् प्रयास।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *