काशी सत्संग: हवा में गुब्बारा

एक आदमी गुब्बारे बेच कर जीवन-यापन करता था। यह गांव के आस-पास लगने वाली हाटों में जाता और गुब्बारे बेचता। बच्चों को लुभाने के लिए वह तरह-तरह के गुब्बारे रखता। लाल, पीले, हरे, नीले और जब कभी उसे लगता की बिक्री कम हो रही है वह झट से एक गुब्बारा हवा में छोड़ देता, जिसे उड़ता देखकर बच्चे खुश हो जाते और गुब्बारे खरीदने के लिए पहुंच जाते।
इसी तरह तरह एक दिन वह हाट में गुब्बारे बेच रहा था और बिक्री बढाने के लिए बीच-बीच में गुब्बारे उड़ा रहा था। पास ही खड़ा एक छोटा बच्चा ये सब बड़ी जिज्ञासा के साथ देख रहा था। इस बार जैसे ही गुब्बारे वाले ने एक सफेद गुब्बारा उड़ाया, वह तुरंत उसके पास पहुंचा और मासूमियत से बोला, “अगर आप ये काल वाला गुब्बारा छोड़ेंगे…तो क्या वो भी ऊपर जाएगा?”
गुब्बारा वाले ने थोड़े अचरज के साथ उसे देखा और बोला,“बिलकुल जाएगा बेटे। गुब्बारे का ऊपर जाना इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि वो किस रंग का है, बल्कि इस पर निर्भर करता है कि उसके अन्दर क्या है।”
मित्रों, ठीक इसी तरह हम इंसानों के लिए भी ये बात लागू होती है. कोई अपनी जीवन में क्या प्राप्त करेगा, ये उसके बाहरी रंग-रूप पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि ये इस बात पर निर्भर करता है कि उसके अन्दर क्या है।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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