काशी सत्संग: अधिकार और कर्तव्य

चार चोर एक गाय चुराकर लाये। चोरों ने उसका बंटवारा इस प्रकार किया कि प्रत्येक चोर उसे बारी–बारी से एक-एक दिन अपने घर रखेंगे। चोर अपने आपको एक दूसरे से अधिक चतुर मानते थे। जिस दिन जिसकी बारी आती वह दूध तो निकाल लेता, मगर गाय को भोजन कोई नहीं देता, क्योंकि वह यह सोचते कि घास पहले दिन वाले ने खिलाई होगी और अगले दिन वाला भी खिलायेगा ही। एक दिन मैं नहीं खिलाऊंगा, तो क्या फर्क पड़ेगा।
चोरों की इस सोच के कारण प्रतिदिन यही क्रम चलता रहा। किसी ने गाय को घास नहीं खिलाई, जिससे उसका दूध सूखता गया। वह दुर्बल हो गई और अंत में उसके प्राण निकल गए।
मित्रों, यदि उन चोरों ने ऐसा नही किया होता, तो सभीं को लाभ मिल रहा होता। सच है कि अधिकार और कर्तव्य से बचने वालों को घाटा भी उठाना पड़ता है और उन्हें अपयश भी मिलता है।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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