काशी सत्संग: भूख गरीब-अमीर!

एक महात्माजी शाम के समय टहलने निकले, तो उन्होंने एक निर्धन को जंगल में देखा, जो इधर-उधर कुछ खोज रहा था। महात्माजी ने उससे पूछा, ‘बाबा क्या खोज रहे हो?’
निर्धन बड़े ही करुण शब्दों में बोला-कुछ खाने योग्य फल-फूल मिल जाए, तो पेट की आग बुझ जाए।
कुछ आगे जाने पर महात्माजी को एक सेठजी कुछ खोजते हुए मिले। उत्सुकता से उन्होंने पूछा, ‘सेठजी, इस जंगल में क्या खोज रहे हो?’ सेठजी ने कहा,’वैद्य द्वारा बताई गई औषधि की पत्तियां खोज रहा हूं, ताकि मुझे भूख लग सके, क्योंकि मुझे कई दिनों से भूख नहीं लग रही है।
महात्माजी ने आकाश की ओर हाथ उठाकर कहा– यह क्या है प्रभु! गरीब रोटी ढूंढता है और अमीर भूख।
ऊं तत्सत..

Post Author: Soni

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