काशी सत्संग : पिताजी की सीख

एक किसान था, उसके दो बेटे थे, दोनों बहुत आलसी थे। किसान जब मरने वाला था, तब उसने अपने दोनों आलसी बेटों को अपने पास बुलाया।
किसान ने अपने बेटों से कहा कि मेरे मरने के बाद तीन बातें हमेशा मेरी याद रखना। पहली बात की धूप में कभी भी दुकान पर नहीं जाना और दुकान से धूप में कभी भी वापस मत आना। दूसरी बात किसी को उधार दो, तो वापस कभी मत मांगना। जब तुम्हारे पास कुछ न मिले, तो तीसरी बात मेरी याद रखना, कुएं के पास जाना और वह कुआं जो गांव के बाहर है, उससे मांगना। अगर कुआं तुम्हें कुछ न दे, तब बीरबल के पास जाना और मेरी यह तीनों बातें बीरबल को बताना। इतना कहकर किसान मर गया।
अब किसान के दोनों बेटे किसान की तीनों बातों पर अमल करने लगे, पहली बात धूप में दुकान पर नहीं जाना और धूप में दुकान से वापस नहीं आना, इसलिए दोनों बेटे छतरी लेकर दुकान पर जाते और छतरी लेकर दुकान से वापस आ जाते। दूसरी बात उन्होंने जब भी उधार दिया, तो वापस किसी से नहीं लिया, तो उधार मांगने वालों का उनके यहां तांता लग गया। लोगों को यह बात पता लग गई थी कि यह दोनों अगर किसी को उधार देते हैं, तो वापस नहीं मांगते और धीरे-धीरे इनका पैसा उधारी देते-देते खत्म हो गया।
अब उन दोनों को किसान की तीसरी बात याद आई, जब कुछ न बचे तब कुएं से मांगना। वे दोनों गांव के बाहर कुएं में गए और जोर-जोर से पैसे मांगने लगे, लेकिन कुएं ने उन्हें कुछ नहीं दिया। फिर, वे दोनों बीरबल के पास गए और सारी बात बताई।
बीरबल ने उनकी बात ध्यान से सुनी और कहा कि तुम अपने पिताजी की बातों का मतलब नहीं समझे, मैं तुम्हें एक-एक करके तीनों बातों का मतलब समझाता हूं।
बीरबल ने कहा कि पहली बात का मतलब कि धूप में दुकान में नहीं जाना और धूप में दुकान से वापस नहीं आना, इसका मतलब यह था कि सूरज उगने के पहले दुकान पर जाओ और सूरज ढलने के बाद दुकान से वापस आओ।
दूसरी बात का मतलब यह था कि तुम किसी को उधार पैसे न दो, अगर तुम किसी को उधार पैसे दोगे ही नहीं, तो वापस मांगने की नौबत ही नहीं आएगी और तीसरी बात का मतलब समझाता हूं इतना बोल कर वह दोनों को कुएं के पास ले गया और एक आदमी को कुएं के अंदर उतारा। वहां से सोने चांदी जेवरात पैसों का भरा संदूक मिला, जो उन दोनों को बीरबल ने दे दिया और कहा कि आप अपने पिताजी के तीनों उपदेश का अच्छे से पालन करो।
वे दोनों अपने पिताजी की बात समझ चुके थे और अब वह किसी को उधार नहीं देते थे। सूरज उगने के पहले काम पर जाते हो, सूरज ढलने के बाद काम से वापस आते खूब मेहनत करते और उन्होंने खूब पैसा कमाया।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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