काशी सत्संग : पुण्यभूमि

स्वामीजी लगभग चार वर्ष तक विदेश में रहे । वहां उन्होंने लोगों के मन में भारत के बारे में व्याप्त भ्रमों को दूर किया तथा हिन्दू धर्म की विजय पताका सर्वत्र फहरायी । जब वे भारत लौटे, तो उनके स्वागत के लिए रामेश्वरम के पास रामनाड के समुद्र तट पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए । उनका जहाज जैसे ही दिखायी दिया, लोग उनकी जय-जयकार करने लगे ।
स्वामीजी ने जहाज से उतरते ही सबसे पहले भारतभूमि को दंडवत प्रणाम किया । फिर वे हाथों से धूल उठाकर अपने शरीर पर डालने लगे । जो लोग उनके स्वागत के लिए मालाएं आदि लेकर आये थे, वे हैरान रह गये। उन्होंने स्वामीजी से इसका कारण पूछा।
स्वामीजी ने कहा, ‘मैं जिन देशों में रह कर आया हूं, वे सब भोगभूमियाँ है। वहां के अन्न-जल से मेरा शरीर दूषित हो गया है । अत: मैं अपनी मातृभूमि की मिट्टी शरीर पर डालकर उसे फिर से शुद्ध कर रहा हूं। मित्रों, हमारा देश सचमुच ही बड़े त्याग, तपस्या और सदविचार वालों की भूमि रही है।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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