काशी सत्संग: सुखी व्यक्ति की कमीज

खलीफा एक बार बीमार पड़ गया। उसे रेशमी वस्त्रों, नर्म गद्दों में भी आराम नहीं मिलता था, नींद नहीं आती थी और बेवजह दुखी रहता था। दुनिया के तमाम वैद्यों हकीमों को बुलाया गया, परंतु किसी को भी बीमारी समझ नहीं आ रही थी। इससे इलाज भी नहीं हो पा रहा था। अंत में एक ऐसे वैद्य को बुलाया गया, जो अपने विचित्र परंतु प्रभावी इलाज हेतु प्रसिद्ध था।
वैद्य ने देखते ही बताया कि खलीफा का इलाज बस यही है कि किसी सुखी व्यक्ति की कमीज खलीफा के सिर पर घंटे भर के लिए रखी जाए। अब सुखी व्यक्ति को ढूंढा जाने लगा। जिसे भी पूछो, वो किसी न किसी कारण से दुखी था। व्यक्तियों को दुखी बनाने के सैकड़ों हजारों अनगिनत कारण थे। इस बीच सुखी व्यक्ति ढूंढने वाले खलीफा के सिपाहियों को एक गरीब चरवाहा अपनी भेड़ों के साथ जाते हुए मिला। उनमें से एक ने चरवाहे से मजाक में पूछा, “क्यों रे! तू सुखी है या दुखी?”
चरवाहे ने उत्तर दिया, “मैं दुखी क्यों होऊं? मैं तो दुनिया का सबसे सुखी इंसान हूं।”
“तो अपनी कमीज उतार हमें अपने खलीफा के लिए यह चाहिए”- एक सिपाही ने कहा।
“पर, मेरे पास न तो कमीज है और न ही मैं कमीज पहनता हूं” चरवाहे ने कहा।
जब यह बात खलीफा तक पहुंची तो उन्होंने मंथन किया और पाया कि उनकी बीमारी की जड़ रेशमी वस्त्र, नर्म गद्दे और हीरे-जवाहरात हैं। खलीफा ने वे सब सामाजिक कार्य में वितरित कर दिए। खलीफा अब स्वास्थ्य और सुखी हो गया था।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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