काशी सत्संग: अलग-अलग दृष्टिकोण

कबीर की सादगी देख उनके कुछ शिष्य दुखी रहते थे। एक दिन साहस करते हुए एक शिष्य बोला, ‘गुरुवर आप सादगी से क्यों रहते हैं? आप एक सिद्ध पुरुष हैं। ऐसे में आपका कपड़ा बुनना भी अजीब है।’
कबीर थोड़ा मुस्कुराए और फिर बोले, ‘पहले मैं अपना पेट पालने के लिए बुनता था, लेकिन अब मैं सभी के अंदर समाए ईश्वर के तन ढकने के लिए और अपना मनोयोग साधने के लिए बुनता हूं। यानी हर व्यक्ति का दृष्टिकोण अलग-अलग होता है।’ शिष्य गुरु की बात की गहराई को समझ गए।
बड़ा व्यक्ति वो है, जो दूसरों के हितों को ध्यान में रखते हुए जीवन यापन करें। कबीर की सादगी और विनम्रता के ऐसे कई उदाहरण हैं। यही प्रेरक बातें उन्हें ओरों से अलग बनाती है।
ऊं तत्सत…

काशी पत्रिका के जरिए हमारी भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता को सजोने-संवारने का सतत् प्रयास।

Post Author: Soni

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