काशी सत्संग: ‛दुर्जन आबाद रहें!’

एक बार एक महात्मा अपने शिष्यों के साथ एक ऐसे गांव में पहुंचे, जहां के लोग साधु-संन्यासियों को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे। कुछ ही दिन वहां रहने के बाद, जब महात्मा वहां से चलने लगे, तब गांव के लोगों ने कहा, ‘महात्माजी कुछ आशीर्वाद तो देते जाइए।’ महात्मा थोड़ी देर तक हंसते रहे, फिर बोले, ‘खूब आबाद रहो।’
ऐसा कह कर महात्मा आगे बढ़े। वे कुछ दूर ही पहुंचे थे कि गांव के कुछ लोग भागते हुए वहां पहुंचे। उन्होंने महात्मा और उनके शिष्यों के खूब सत्कार किया। आगे बढ़ने से पहले महात्मा ने कहा, ‘सभी उजड़ जाओ।’
महात्माजी के ऐसे अटपटे आशीर्वाद से परेशान होकर एक व्यक्ति ने उनसे पूछा, ‘महात्मा जी! जिन लोगों ने अतिथि धर्म का तिरस्कार किया, उन्हें आपने आबाद रहने का और जो लोग आपकी सेवा में आए उन्हें उजड़ने का आशीर्वाद क्यों दिया!’
महात्मा ने उस व्यक्ति से कहा, ‘सज्जन व्यक्ति जहां जाता है, वो वहां अपनी अच्छाइयों को ले जाता है, जबकि दुर्जन व्यक्ति अवगुण। इसी लिए मैंने दुर्जन लोगों को उसी गांव में आबाद रहने का आशीर्वाद दिया और सज्जनों को उजड़ने का यानी समाज में अच्छाई फैलाने का आशीर्वाद दिया।’
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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