काशी सत्संग:सही-गलत का अंतर

एक दिन बादशाह अकबर ने सोचा, हम रोज-रोज न्याय करते हैं। इसके लिए हमें सही-गलत का पता लगाना पड़ता है। लेकिन सही और गलत के बीच आखिर अंतर कितना होता है? दूसरे दिन बादशाह अकबर ने यह सवाल दरबारियों से पूछा। दरबारी इस प्रश्न का क्या उत्तर देते। वे एक-दूसरे की शक्ल देखने लगे। बादशाह समझ गए कि किसी के पास इस सवाल का जवाब नहीं है, इसलिए उन्होंने बीरबल से पूछा,“तुम्हीं बताओ सही और गलत में कितना अंतर है?”
बीरबल चौंके। वह तो समझते थे कि इस सवाल का कोई जवाब नहीं हो सकता। उन्होंने बादशाह से कहा, “जहांपनाह। आंख और कान के बीच चार अंगुल का अंतर है। यही सही-गलत के बीच की दूरी है। आप जिसे अपनी आंखों से देखते हैं, वह सही है।
जिसे अपने कानों से सुनते हैं, वह गलत भी हो सकता है। इसलिए सही और गलत के बीच चार अंगुल का अंतर माना जाएगा।”
यह सुनकर बादशाह अकबर बोले- “वाह! बीरबल वाह! तुम्हारी बुद्धि और चतुराई का जवाब नहीं।” मित्रों, जीवन के प्रति अपने विचार जाहिर करने से पहले आप अच्छी तरह सोच लें कि आपके विचार सही हैं या गलत! ये चार अंगुल का अंतर सही या गलत समझने में काफी मददगार साबित होगा।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

काशी पत्रिका के जरिए हमारी भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता को सजोने-संवारने का सतत् प्रयास।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *