इश्क-ए-वतन में जां-कुर्बान

कश्मीर की धरती पर शहीद हुए बनारस के लाल

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने जहां पूरे देश को झकझोर दिया, वहीं अपने बनारस के दो लाल भी शहीदों की टोली में शामिल हो गए। आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 44 जवान शहीद हो गए, जिनमें 10 यूपी से मातृभूमि की रक्षा को मुस्तैद थे। इस दुर्दांत घटना में दर्जनों जवान घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर है। फौरी तौर पर आई सूचना के तहत हमले की जिम्मेदारी आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने ली है।
काल के कपाल पर..
एक तरफ देश जहां मुहब्बत के पर्व को जी रहा था, तो दूसरी तरफ वतन से इश्क करने वाले जवान काल के कपाल पर कुछ लिख-मिटा रहे थे। जी हां, 14 फरवरी की सुबह तो मुस्कान में लिपटी थी लेकिन शाम होते ही मनहूस स्याह सी खबर आई कि जम्मू से श्रीनगर जा रही सीआरपीएफ की 70 गाड़ियों के काफिले पर आतंकी हमला किया गया है। इस काफिले में करीब 2500 से ज्यादा जवान शामिल थे। सीआरपीएफ जवानों के काफिले पर विस्फोटकों से भरी गाड़ी को टकराकर इस आत्मघाती हमले को अंजाम दिया गया। पिछले तीन दशक में जम्मू कश्मीर में हुए आतंकी हमलों में यह हमला सबसे बड़ा आतंकी हमला है।
जुबां नहीं, जमीर जगाओ..
इस हमले की न केवल देश भर में भर्त्सना की गई, बल्कि विदेशों ने भी कड़ी निंदा की है। अमेरिका और रूस सहित कई देशों ने इस आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंक के खिलाफ भारत की लड़ाई में साथ देने का वादा किया है। हालांकि, पाकिस्तान ने भी घटना से अपना पल्ला झाड़ते हुए आतंकवाद की निंदा की है। एक आधिकारिक बयान में भारतीय मीडिया की रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए पाकिस्तान ने कहा है इस घटना से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
आरोप-प्रत्यारोप से परे सच यह है कि देश के दर्जनों घरों के चिराग बुझ गए और तमाम सपूत देश की आन-बान-शान में न्यौछावर हो गए। इनमें यूपी के भी लगभग दर्जन भर जवान शामिल हैं, जिनमें आधे पूर्वांचल से हैं। बनारस के शहीद रमेश यादव और मुगलसराय के शहीद अवधेश कुमार यादव के घर में गुरुवार की शाम कहर बनकर टूटी। दोनों ही परिवार अपने लाडले के छुट्टियों पर लौटने का इंतजार कर रहे थे। उन्हें क्या पता था कि उनके घर का चिराग देश रक्षा के लिए खुद की शपथ को अपने खून से सींचकर निभा रहा है।
किसके निशाने पर कौन !
पुलवामा हमले में यूपी के जो 10 जवान शहीद हुए, उनमें वाराणसी के शहीद रमेश यादव, चंदौली में मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के बहादुपुर गांव निवासी शहीद अवधेश कुमार यादव हैं। इनके साथ हमकदम रहे इलाहाबाद के शहीद महेश, देवरिया के शहीद विजय मौर्या, शामली के शहीद प्रदीप, शहीद अमित कुमार। इनके अलावा आगरा के शहीद कौशल कुमार यादव, उन्नाव के शहीद अजीत कुमार, कानपुर के शहीद श्यामबाबू और कन्नौज के शहीद प्रदीप सिंह भी उसी बस में सवार थे, जिसे आतंकियों ने निशाना बनाया।
आतंक तुम कब जाओगे !
ताजा आतंकी हमलों पर जुबानी जंग जरूर तेज हो गई है। सरकार अपना सरकारी फर्ज निभा रही है, तो नेताजी लोग अपने बयान से आतंकवाद की लानत-मलानत कर रहे हैं। इन सबके बीच मूल प्रश्न जस का तस है कि आखिर कब तक आतंकवाद से यह लड़ाई चलेगी और कितनी जानें शहादत झेलेंगी। आखिर कब खत्म होगी आतंक का रास्ता छोड़ देने की जिद। ऐ मेरे वतन के शहीदों, तुम्हें काशी पत्रिका का शत शत नमन, तुम्हारे परिजन के साथ काशी पत्रिका गहरी संवेदना रखता है।

और कितनी शहादत बाकी है दिखाने को
कब जागेंगे नींद से वो सफेद कबूतर
कब बुझेगी आतंकी पतंगों की चिंगारी
कब आएगा अमन अब तो बता ऐ मेरे वतन
■ काशी पत्रिका

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Post Author: kashipatrika

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