हर एक हाल में तेवर बला के रखते हैं

चराग दिल का मुकाबिल हवा के रखते हैं,
हर एक हाल में तेवर बला के रखते हैं।

मिला दिया है पसीना भले ही मिट्टी में,
हम अपनी आँख का पानी बचा के रखते हैं।

हमें पसंद नहीं जंग में भी मक्कारी,
जिसे निशाने पे रक्खें बता के रखते हैं।

कहीं खुलूस कहीं दोस्ती कहीं पे वफा,
बड़े करीने से घर को सजा के रखते हैं।

अना-पसंद हैं ‘हस्ती’-जी सच सही लेकिन,
नजर को अपनी हमेशा झुका के रखते हैं।
■ हस्तीमल हस्ती

Post Author: Soni

काशी पत्रिका के जरिए हमारी भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता को सजोने-संवारने का सतत् प्रयास।

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