काशी सत्संग: यूं टूटा कालीदास का अहं

अपार यश, प्रतिष्ठा और सम्मान पाकर एक बार कालिदास को अपनी विद्वत्ता का घमंड हो गया। उन्हें लगा कि उन्होंने विश्व का सारा ज्ञान प्राप्त कर लिया है और अब सीखने को कुछ बाकी नहीं बचा। उनसे बड़ा ज्ञानी संसार में कोई दूसरा नहीं। एक बार पड़ोसी राज्य से शास्त्रार्थ का निमंत्रण पाकर कालिदास महाराज […]

साहित्यिक झरोखा: कबीर के ‛राम’ या राम के ‛कबीर’

‘हरिमोर पिउ, मैं राम की  बहुरिया… ‘हरि जननी मैं बालक तोरा…  सरल शब्द रचना और बोली में आत्मीयता से जो लौकिक और अलौकिक बात कही जा सकती हो वो विरले ही कठिन वेदों और मंत्रोचार से आम जन तक पहुंचाई जा सकती हैं। भारतीय साहित्य ने भी एक समय ऐसा देखा जब जनसामान्य की भाषा ने साहित्य पर […]

हिंदुस्तान का “हृदय” हिंदी

देश की आजादी के बाद संविधान निर्माताओं के सामने जब देश की संपर्क भाषा का सवाल आया, तो उन्हें हिंदी सबसे बेहतर विकल्प लगी। लेकिन दक्षिण और पूर्वोत्तर के राज्यों को हिंदी के राष्ट्रभाषा बनाए जाने पर आपत्ति के चलते इसे केवल सरकारी कामकाज की भाषा यानी “राजभाषा” के तौर पर प्रतिष्ठित किया जा सका। […]

साहित्यिक झरोखा: “मृगावती” के कुतबन

शेख बूढ़न जग सांचा पीर, नाउ लेत सुध होइ सरीर। कुतुबन नाउं लै रे पा धरे, सुहरवरदी दुहुं जग निरमरे। पछिले पाप धोइ सब गए, जोऊ पुराने ओ सब नए। नौ के आज भएउ अवतारा….. भारत में सूफीमत का क्रमबद्ध इतिहास 1180 ई. में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के आगमन से प्रारम्भ होता हैं। माना जाता हैं कि […]

Mirch Masala_Kashi Patrika

मिर्च मसाला

वैसे तो पिछले चार सालों में देश में बहुत कुछ बदल गया है। नहीं बदली हैं तो बस आम आदमी की जिंदगी। बदलती भी कैसे उसके न तो पैसों में ही कुछ इजाफा हुआ हैं कि वो कुछ सुकून के पल खरीद ले और न रुतबा ही बढ़ा कि अपनी ख्वाबगाह को ही सजाए।आज मौका […]

‘अमृत- वाणी’ – श्रेष्ठतम रचना इंसान है जो कर्मण्यता या अकर्मण्यता से सुख- दुःख पाता है..

एक मुहल्ले में कुत्तों की संख्या बहुत  हो गयी थी और इसका कारण था मुहल्ले में रहने वाले एक दयालु सज्जन। सज्जन बहुत कर्मठ भी थे और अपने मेहनत की कमाई को जानवरों पर बड़ी श्रद्धा से खर्च करते थे। कुत्तो को बड़े चाव से अंडे, बिस्कुट, ब्रेड दिया करते थे। उसकी मुहल्ले में एक […]

अमृत-वाणी’ – भगवान के नाम से इस तरह का खेल बहुत पुराना है।…

उत्तर के एक गांव में जाति के आधार पर कुँए बाटे गए थे। गांव में कुँए दो समुदायों में बाट दिए गए थे। ऐसा न था के लोग छुआ-छूत में फसे हुए हो। एक दूसरे से मेल मिलाप तो था पर पीने के पानी को वो छू नहीं सकते थे। जहाँ एक कुआं बहुत मीठा […]