मुलायम सिंह-साधना गुप्ता की शादी की धुरी थे अमर सिंह

अमर सिंह को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अपने हाईप्रोफाइल कनेक्शन के चलते हमेशा चर्चा में रहने वाले राज्यसभा सदस्य ठाकुर अमर सिंह गजब के लड़ाकू और ज़िंदादिल तबियत के इंसान थे। दोस्ती तो वह बड़ी शिद्दत से निभाते थे। मुलायम सिंह यादव से लेकर अमिताभ बच्चन तक, अनिल अंबानी से लेकर कुमार मंगलम बिड़ला तक से उनके […]

बेबाक हस्तक्षेप

‘मेले में भटके होते तो कोई घर पहुंचा जाता, हम घर में भटके हैं कैसे ठौर-ठिकाने आएंगे।’ दुष्यंत कुमारजी की ये पंक्तियां इन दिनों सामने आए ‘तबलीगी मरकज’ के लोगों पर एकदम फिट बैठती मालूम पड़ती है। पहले तो, विश्व में फैैली महामारी ‘कोरोना’ के बीच अपने और अपनों की तबीयत से बेपरवाह हो गुपचुप […]

बेबाक हस्तक्षेप

निदा फाजली की लिखी पंक्ति आज अचानक याद हो आई, “स्टेशन पर खत्म की भारत तेरी खोज, नेहरू ने लिखा नहीं कुली के सर का बोझ।” कुछ ऐसा ही हाल सालों से धरती के स्वर्ग (जम्मू-कश्मीर) का था, जहां की खूबसूरत वादियों का जिक्र अब सिर्फ किस्सा बन कर रह गया था और जमीनी हालात […]

‛अक्षय’ इंटरव्यू

देश सिर से पांव तक राजनीतिक रंग में सराबोर है। आज काशी में सात राज्यों के सीएम सहित दर्जनों वीआईपी दरबार लगाएंगे, भव्य रोड शो होगा और कल यानी 26 अप्रैल को चुनावी पर्चा भी भर जाएगा। इन सबके बीच यकायक देश के माननीय गैर राजनीतिक क्यों हो गए, वो भी एक अभिनेता के साथ! […]

इब्नबतूता…बगल में जूता

गुलजार साहब कभी-कभी कुछ अटपटे से फिल्मी गीत भी लिख देते हैं, ऐसा मेरा व्यक्तिगत ख्याल है। लेकिन देश के ताजा राजनीति में भी प्रतिदिन कुछ न कुछ अटपटा घट जाता है, जिस पर एक ऐसा ही गीत फिट बैठता है। बोल कुछ ऐसे हैं- “इब्नबतूता बगल में जूता पहने तो करता है जुर्म उड़ […]

दुविधा में दोनों गए, माया मिली न…

राजनीति बेहद दिलचस्प खेल है, जहां हालात के मुताबिक दोस्त-दुश्मन बदलते रहते हैं। तभी, मंच पर दो धुर विरोधी फिर एकसाथ हैं और सिर्फ साथ ही नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति आभार भी व्यक्त किया जा रहा है। अब गुजरे जमाने की चर्चा करें तो, बसपा को चुनावी गठबंधन रास नहीं आता है, क्यों? […]

जय हिंद की सेना

एक बार फिर हमने साबित कर दिया कि हम भारत हैं और हमारी ओर उठने वाली हर नापाक नजर हमेशा के लिए सुला दी जाएगी। कुछ ऐसा ही हुआ पुलवामा हमले के ठीक 12 दिन बाद, जब हमने पीओके में घुसकर हर उस चिंगारी को बुझा दिया जो हमारे घर को जलाने की तैयारी में […]

इश्क-ए-वतन में जां-कुर्बान

कश्मीर की धरती पर शहीद हुए बनारस के लाल

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने जहां पूरे देश को झकझोर दिया, वहीं अपने बनारस के दो लाल भी शहीदों की टोली में शामिल हो गए। आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 44 जवान शहीद हो गए, जिनमें 10 यूपी से मातृभूमि की रक्षा को मुस्तैद थे। इस दुर्दांत घटना में दर्जनों जवान घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर है। फौरी तौर पर आई सूचना के तहत हमले की जिम्मेदारी आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने ली है।
काल के कपाल पर..
एक तरफ देश जहां मुहब्बत के पर्व को जी रहा था, तो दूसरी तरफ वतन से इश्क करने वाले जवान काल के कपाल पर कुछ लिख-मिटा रहे थे। जी हां, 14 फरवरी की सुबह तो मुस्कान में लिपटी थी लेकिन शाम होते ही मनहूस स्याह सी खबर आई कि जम्मू से श्रीनगर जा रही सीआरपीएफ की 70 गाड़ियों के काफिले पर आतंकी हमला किया गया है। इस काफिले में करीब 2500 से ज्यादा जवान शामिल थे। सीआरपीएफ जवानों के काफिले पर विस्फोटकों से भरी गाड़ी को टकराकर इस आत्मघाती हमले को अंजाम दिया गया। पिछले तीन दशक में जम्मू कश्मीर में हुए आतंकी हमलों में यह हमला सबसे बड़ा आतंकी हमला है।
जुबां नहीं, जमीर जगाओ..
इस हमले की न केवल देश भर में भर्त्सना की गई, बल्कि विदेशों ने भी कड़ी निंदा की है। अमेरिका और रूस सहित कई देशों ने इस आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंक के खिलाफ भारत की लड़ाई में साथ देने का वादा किया है। हालांकि, पाकिस्तान ने भी घटना से अपना पल्ला झाड़ते हुए आतंकवाद की निंदा की है। एक आधिकारिक बयान में भारतीय मीडिया की रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए पाकिस्तान ने कहा है इस घटना से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
आरोप-प्रत्यारोप से परे सच यह है कि देश के दर्जनों घरों के चिराग बुझ गए और तमाम सपूत देश की आन-बान-शान में न्यौछावर हो गए। इनमें यूपी के भी लगभग दर्जन भर जवान शामिल हैं, जिनमें आधे पूर्वांचल से हैं। बनारस के शहीद रमेश यादव और मुगलसराय के शहीद अवधेश कुमार यादव के घर में गुरुवार की शाम कहर बनकर टूटी। दोनों ही परिवार अपने लाडले के छुट्टियों पर लौटने का इंतजार कर रहे थे। उन्हें क्या पता था कि उनके घर का चिराग देश रक्षा के लिए खुद की शपथ को अपने खून से सींचकर निभा रहा है।
किसके निशाने पर कौन !
पुलवामा हमले में यूपी के जो 10 जवान शहीद हुए, उनमें वाराणसी के शहीद रमेश यादव, चंदौली में मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के बहादुपुर गांव निवासी शहीद अवधेश कुमार यादव हैं। इनके साथ हमकदम रहे इलाहाबाद के शहीद महेश, देवरिया के शहीद विजय मौर्या, शामली के शहीद प्रदीप, शहीद अमित कुमार। इनके अलावा आगरा के शहीद कौशल कुमार यादव, उन्नाव के शहीद अजीत कुमार, कानपुर के शहीद श्यामबाबू और कन्नौज के शहीद प्रदीप सिंह भी उसी बस में सवार थे, जिसे आतंकियों ने निशाना बनाया।
आतंक तुम कब जाओगे !
ताजा आतंकी हमलों पर जुबानी जंग जरूर तेज हो गई है। सरकार अपना सरकारी फर्ज निभा रही है, तो नेताजी लोग अपने बयान से आतंकवाद की लानत-मलानत कर रहे हैं। इन सबके बीच मूल प्रश्न जस का तस है कि आखिर कब तक आतंकवाद से यह लड़ाई चलेगी और कितनी जानें शहादत झेलेंगी। आखिर कब खत्म होगी आतंक का रास्ता छोड़ देने की जिद। ऐ मेरे वतन के शहीदों, तुम्हें काशी पत्रिका का शत शत नमन, तुम्हारे परिजन के साथ काशी पत्रिका गहरी संवेदना रखता है।

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बजट की बाजीगरी

बनारस के लिए वित्तमंत्री की झोली खाली आखिरकार जैसी उम्मीद/आशंका थी, वैसा ही हुआ। विश्व पटल पर तेज रफ्तार से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था में हर साल पेश होने वाला आम बजट इस बार चुनावी बजट सा नजर आ रहा है। चूंकि, अपने प्रधानमंत्री बनारस से चुनकर गए हैं, तो उम्मीद की जा रही थी कि […]

दिन, महीने, साल.. गुजरते जाएंगे..

वक्त की घड़ियां कभी थमतीं नहीं ये अलग बात है धड़कन थम जाए जी हां, 31 दिसंबर की रात ठीक 12 बजे जैसे ही घड़ी की दो सूइयों का संगम हुआ, प्रहर के पहरे ने कलेंडर बदल लिया। धड़कनों की रफ्तार ने भी जिंदगी से एक धड़कन कम कर अगले वर्ष में छलांग लगा दी। […]