काशी सत्संग: पुण्य पर भारी पाप

श्रीकृष्ण जब महाभारत के युद्ध के बाद लौटे, तो रुक्मिणी ने कुछ नाराज होकर उनसे पूछा, “आपने द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह जैसे धर्मपरायण लोगों के वध में क्यों साथ दिया?” इस पर श्रीकृष्ण बोले- देवी ये सही है कि वे दोनों धर्मपरायण थे और दोनों ने ही पूरे जीवन धर्म का पालन किया, लेकिन उनके […]

प्रेम की भाषा

भाषा दो प्रकार की है : तर्क की भाषा और प्रेम की भाषा। और दोनों में बुनियादी भेद है। तर्क की भाषा से इतर प्रेम की भाषा अहंकार रहित होती है, जहां सिर्फ तुम्हारी चिंता होती है… तर्क की भाषा आक्रामक, विवादी और हिंसक होती है। अगर मैं तार्किक भाषा का प्रयोग करूं, तो मैं […]

बेबाक़ हस्तक्षेप

आरोप लगाना ही आज की राजनीति का आधार बनता जा रहा है। इसका संकेत २०१४ में स्पष्ट हो गया जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की और देश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन कर आयी।  दोनों ही राजनीतिक दलों को जनता ने सिर माथे ही लिया और गद्दी पर बिठाया। अब जब सत्ता के […]

साहित्यिक झरोखा:आदर्श प्रेम के रचयिता ‘मंझन

विक्रम धँसा प्रेम के बारा । सपनावति कहँ गयउ पतारा॥ मधुपाछ मुगधावति लागी । गगनपुर होइगा बैरागी॥ राजकुँवर कंचनपुर गयऊ । मिरगावती कहँ जोगी भयऊ॥ साधो कुँवर ख्रडावत जोगू । मधुमालति कर कीन्ह बियोगू॥ प्रेमावति कह सुरबर साधा। उषा लागि अनिरुधा बर बाँधा॥ सूफियों के अनुसार, यह सारा जगत् एक ऐसे रहस्यमय प्रेमसूत्र में बँधा […]

हिंदुस्तान का “हृदय” हिंदी

देश की आजादी के बाद संविधान निर्माताओं के सामने जब देश की संपर्क भाषा का सवाल आया, तो उन्हें हिंदी सबसे बेहतर विकल्प लगी। लेकिन दक्षिण और पूर्वोत्तर के राज्यों को हिंदी के राष्ट्रभाषा बनाए जाने पर आपत्ति के चलते इसे केवल सरकारी कामकाज की भाषा यानी “राजभाषा” के तौर पर प्रतिष्ठित किया जा सका। […]

बेबाक हस्तक्षेप

देश की सियासत का स्तर किस तरह गिर रहा है ये नेताओं के दिन-प्रतिदिन दिए जा रहे बयानों से समझना मुश्किल नहीं है। लेकिन बयानबाजी का यह सिलसिला सिर्फ आपसी राजनीति की बखिया उघेरने का काम ही नहीं कर रहा, बल्कि आम जन से जुड़े मुद्दों-योजनाओं को लेकर भी झूठे किस्से गढ़ने से गुरेज नहीं […]

सप्ताहांत

हफ्तेभर की खबरों का लेखाजोखा॥ आम जन के चश्मे से देखे तो, माल्या से लेकर तेल की बढ़ती कीमतों तक सियासी आरोप-प्रत्यारोप के बीच जनता का दामन खाली ही है। महंगाई, रोजगार से लेकर जात-पात तक उसकी हालत “न खुदा ही मिला, न विसाले सनम” जैसी है।  राजनीति से इतर सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना […]

एक दिन हिंदी दिवस

अपने को आता है बस इसमें ही रस वर्ष में मना लेते एक दिन हिंदी दिवस मानसिकता पूर्णतया: इंगलिश की है ‘लवली एटीकेट’ से ‘लव’ ‘प्यार फारेन डिश’ से है अपना पप्पू ‘टाप’ है इस साल ‘कोचिंग क्लास’ में अब तो नाता उसके ‘फ्यूचर’ और उसके ‘विश’ से है हिंदी का ‘स्कोप’ क्या है? रह […]