काशी सत्संग: भक्त की भावना

एक गांव में एक पंडित जी रहते थे। किसी गांव में जाकर एक बार वो कथा सुना रहे थे। प्रसंग में श्रीकृष्ण जी के ऐश्वर्य जीवन और उनके विलक्षण आभूषणों का वर्णन का पाठ चल रहा था। वहां कई श्रोता पंडितजी की कथा सुन रहे थे। उनमें से एक डाकू भी था। जब पंडितजी घर […]

काशी सत्संग: मन मातंग

एक संत थे, बड़े तपस्वी और बहुत संयमी। लोग उनके धैर्य की प्रशंसा करते थे। एक दिन उनके मन में विचार आया कि उन्होंने खान-पान पर तो संयम कर लिया, लेकिन दूध पीना उन्हें बहुत प्रिय था। उसे त्याग करने के बारे में मन बनाया। इस तरह संत ने दूध पीना छोड़ दिया। सभी लोगों […]

काशी सत्संग: अंधकार की दुविधा

एक बार अंधकार ने भगवान के पास जाकर शिकायत की, ‘भगवान ये सूर्य मेरे पीछे बुरी तरह पड़ा है। मैं इससे बहुत परेशान हूं। यह व्यर्थ ही मेरा पीछा करता रहता है। मैं थोड़ी देर के लिए भी विश्राम नहीं कर पाता हूं। सदियों से ऐसा ही चलता आ रहा है।’ अंधकार की बात सुनकर […]

काशी सत्संग: सफलता की छटपटाहट

महान दार्शनिक सुकरात से एक बार एक युवक मिला। उसने सफलता पाने का उपाय पूछा। सुकरात ने उसे अगले दिन आने के लिए कहा। अगले दिन युवक ने फिर से वही सवाल पूछा, तो सुकरात ने उसे फिर से अगले दिन आने को कहा। कई महीने बीत जाने के बाद भी लड़का रोज आता और […]

काशी सत्संग : विनम्रता क्यों!

एक संत अपने शिष्य के साथ जंगल में जा रहे थे। ढलान पर से गुजरते वक्त अचानक शिष्य का पैर फिसला और वह तेजी से नीचे की ओर लुढ़कने लगा। वह खाई में गिरने ही वाला था कि तभी उसके हाथ में बांस का एक पौधा आ गया। उसने बांस के पौधे को मजबूती से […]

चैत्र नवरात्र : वर्तमान समय में क्या करें!

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।  शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते॥ इस वर्ष चैत्र नवरात्र चैत्र शुक्ल पक्ष यानी 25 मार्च से प्रारंभ होकर 2 अप्रैल अर्थात रामनवमी को समाप्त हो रहा है। इसी शुभ समय में देश में ऋतु परिवर्तित होता है और सम्पूर्ण वातावरण एक आध्यात्मिक ऊर्जा से लबरेज रहता है। शुभ मुहूर्त में नौ दिन देवी […]

काशी सत्संग: मूलमंत्र

एक प्रसिद्ध लेखक के सम्मान में एक कॉलेज के छात्रों ने भोज का आयोजन किया। उस भोज में नगर के विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। छात्रों का इतना भव्य आयोजन देखकर लेखक बहुत खुश हुए। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने कहा, ‘इस कॉलेज के छात्र बहुत उत्साही हैं। उत्साह ही सफलता की पहली […]

काशी सत्संग: छोटी सी उम्मीद

एक बार एक व्यक्ति रेगिस्तान में कहीं भटक गया । उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी बहुत चीजें थीं, वो जल्द ही खत्म हो गईं और पिछले दो दिनों से वह पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था। वह मन ही मन जान चुका था कि अगले कुछ घंटों में अगर उसे कहीं […]

काशी सत्संग: नहले पर दहला

कथाकार चार्ल्स डिफेन्स की इंग्लैंड में ख्याति फैल गई, तो एक दिन महारानी विक्टोरिया ने उन्हें अपने महल में आमंत्रित किया। जब वो वहां पहुंचे, तो उन्होंने उनसे कहानी सुनाने का आग्रह किया। चार्ल्स परम स्वाभिमानी व्यक्ति थे। उन्हें महरानी के महल में पहुंचकर कहानी सुनाने में अपना अपमान महसूस हुआ। वह अदब से झुककर […]

काशी सत्संग: काटने और जोड़ने का फर्क

एक दिन स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण, एक दर्जी का बेटा, अपने पापा की दुकान पर चला गया। वहां जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा। उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं और कैंची को पैर के पास टांग से दबा […]