काशी सत्संग: राम भरोसे

एक बार एक राजा नगर भ्रमण को गया, तो रास्ते में उसने देखा कि एक छोटा बच्चा मिट्टी के खिलौनो के कान में कुछ कहता, फिर उन्हें तोड़ देता और खिलौनों को मिट्टी में मिलाने की कोशिश करता। राजा को बड़ा अचरज हुआ। उसने बच्चे से पूछा-‘तुम ये सब क्या कर रहे हो?’ बच्चे ने […]

काशी सत्संग: विवेकहीन नकल की दुर्गति

पाटलिपुत्र में मणिभद्र नाम का एक सेठ रहता था। समय एक सा नहीं रहा, इसलिए वह कुछ दिनों बाद निर्धन हो गया। एक दिन जब वह सोया हुआ था, तब पूर्वजों का संचित धन उसके सपने में आया। धन एक साधु के वेश में आया, तो उसने मणिभद्र से कहा, ‘मैं तुम्हारे पास इसी वेश […]

काशी सत्संग: गहरा प्रेम

कृष्ण और सुदामा का प्रेम बहुत गहरा था। प्रेम भी इतना कि कृष्ण, सुदामा को रात-दिन अपने साथ ही रखते थे। कोई भी काम होता, दोनों साथ-साथ ही करते। एक दिन दोनों वनसंचार के लिए गए और रास्ता भटक गए। भूखे-प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुंचे। पेड़ पर एक ही फल लगा था। कृष्ण ने […]

काशी सत्संग: कर्ण का धर्म!

द्वापरयुग में महाभारत युद्ध के समय की बात है। कौरवों और पांडवों में युद्ध चल रहा था। कर्ण, अर्जुन को मारने की शपथ ले चुके थे। कर्ण लगातार बाणों की बारिश कर रहे थे। यह देख भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का रथ जमीन में नीचे झुका दिया। कर्ण का एक तीर, अर्जुन के मुकुट को […]

काशी सत्संग: परम मित्र

एक व्यक्ति था उसके तीन मित्र थे। एक मित्र ऐसा था, जो सदैव साथ देता था। एक पल, एक क्षण भी बिछुड़ता नहीं था। दूसरा मित्र ऐसा था, जो सुबह-शाम मिलता और तीसरा मित्र जिससे काफी दिनों में कभी मुलाकात हो जाती। एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि उस व्यक्ति को अदालत में जाना था […]

काशी सत्संग: श्राद्ध का फल

संत एकनाथ मानवता, दया और करुणा के पक्षधर थे। एक समय की बात है उनके घर में श्राद्ध की तैयारियां चल रही थीं। विभिन्न तरह के व्यंजन बनाए जा रहे थे। घर पूरी तरह से स्वादिष्ट खाने की सुगंध से महक रहा था। तभी वहां से एक निर्धन परिवार गुजरा। उस परिवार में माता-पिता और […]

काशी सत्संग: हंसना जरूरी है!

एक गांव में एक विदेशी यात्री आया। उस गांव के बारे में, उसने काफी कुछ सुन रखा था। उसने वहां काफी सुंदर जगह देखी। वहां के लोग विदेशी यात्रियों की काफी कुछ सहायता करते थे, लेकिन हर व्यक्ति पैसे की पीछे भागता था। कोई भी व्यक्ति मनोरंजन के लिए कुछ भी नहीं करते। न ही […]

काशी सत्संग: यह चक्र है लाजवाब

बहुत समय पहले की बात है। पर्शिया राज्य के नागरिक पक्षियों से काफी परेशान थे। बहुत सारे पक्षी आते और वहां के किसानों की फसलों को तबाह कर जाते। परेशान किसान अपना दुःख लेकर वहां के राजा फ्रेडरिक के पास पहुंचे। फ्रेडरिक क्रोधित हो गया। उसने तत्काल घोषणा की कि राज्य के सारे पक्षियों को […]

काशी सत्संग : क्रोध में विवेक आजमाएं

जापान के किसी गांव में एक समुराई बूढ़ा योद्धा रहता था। उसके पास कई समुराई युद्ध कला सीखने आते थे। एक बार एक विदेशी योद्धा उसे पराजित करने के लिए आया। वह साहसी था। उसके बारे में यहां तक कहा जाता था कि वह जहां भी जाता, विजयी होकर ही वापस अपने देश लौटता था। […]

काशी सत्संग: पत्नी का मंदिर

हमारे धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि नारी की पूजा जहां होती है, वहां कभी धन की कमी नहीं होती। वहां देवताओं का वास होता है, लेकिन संसार में ऐसे लोग भी होते हैं, जो नारी को विशिष्ट सम्मान देते हैं। हिंदी के महान साहित्यकार महावीर प्रसाद द्विवेदी इन्हीं में से एक हैं। उन्होंने पत्नी […]