आस्था की महाडुबकी

सत्यं नास्ति तपः शौचं, दया दानं न विद्यते। उदरम्भरिणो जीवा, वराकाः कूटभाषिणः।। इस युग में सत्य खो रहा है, तपस्या लुप्तप्राय हो गई है, शुद्धता भी नगण्य है, दया-धर्म और दान लोगों से दूर हो गए हैं। आज का मनुष्य सिर्फ और सिर्फ अपना पेट भरने में लगा है, बहुत आलसी हो गया है और […]

दिन, महीने, साल.. गुजरते जाएंगे..

वक्त की घड़ियां कभी थमतीं नहीं ये अलग बात है धड़कन थम जाए जी हां, 31 दिसंबर की रात ठीक 12 बजे जैसे ही घड़ी की दो सूइयों का संगम हुआ, प्रहर के पहरे ने कलेंडर बदल लिया। धड़कनों की रफ्तार ने भी जिंदगी से एक धड़कन कम कर अगले वर्ष में छलांग लगा दी। […]

भोले भण्डारी- सप्त पाठ

उड़ गए तोते देश के राजनीतिक वांग्मय में अनादि काल से ही शकुन-अपशकुन, जादू-टोने, और टोटकों का बोलबाला रहा है। त्रेता युग के यशस्वी राजा राम भी इससे अछूते नहीं थे। रामायण में ढेरों ऐसे आख्यान हैं, जिनमें मुख्यतः बाई आँख का फड़फड़ाना, खाली घड़ों का मार्ग में मिलना इत्यादि है। अब जब प्रभु ही […]

भोले भण्डारी- षष्ठः पाठ

अंधेर नगरी, चौपट राजा “अपना देश बेशक महान है, सौ में से निन्यान्वे बईमान हैं…” ये फिल्मी डॉयलॉग देश और देशवासियों के साथ कुछ ऐसा चिपका है कि सालों से सत्ता परिवर्तन के बावजूद ईमानदारी की शीतल बयार देश में बहने का नाम ही नहीं ले रही है। अपने शासन के चरम पर किसी प्रधानमंत्री […]

भोले भण्डारी- पंचम पाठ

आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास देश में हर कोई अपने काम से असंतुष्ट है। रोजमर्रा की भागम-दौड़ और दो जून की रोटी कमाने में सभी के पसीने छूट जाते हैं। ऐसे में, जब हर तरफ देश की अव्यवस्था ने लोगों का जीना दूभर कर रखा है, केवल कुछ लोग इस धरातल पर […]

चुनावी चाय, बनारसी चर्चा

तमाम राजनीतिक उपद्रव के बाद आखिर पांच राज्यों की जनता ने नए जनार्दन तय कर दिए और भविष्य की आशंका, अनुमान को भी हवा दे दी। सत्ता की जुगाली करने का आदी अपना बनारस भी इससे कहां अछूता है, इलेक्शन चाहे कहीं हो चर्चा तो बनारसियों की जागीर है। इसी उम्मीद से यह अनपढ़ भी […]

भोले भण्डारी- चतुर्थ पाठ

‘नाच न जाने आंगन टेढ़ा’ भारतीय जीवन में भाग्य का इतना महत्व है कि इसके बिना आम हिन्दुस्तानी के जीवन की परिकल्पना ही नहीं की जा सकती। मरना-जीना, सुख-दुख, लाभ-हानि, सोना-जागना सभी भाग्य भरोसे ही तो होता है। भारत की मूल अवधारणा के सबसे निकट किसान और उसकी खेती से इस भाग्य का तो चोली- […]

भोले भण्डारी- तृतीय पाठ

शाम-दाम-दंड-भेद वैसे तो, देश के कोने-कोने में लोगों का जमावड़ा इतना अधिक हो गया है कि अब कुछ दिनों बाद हमें भी चीटियों की जमात में शामिल किया जा सकता है। हो सकता हैं कि हमें सामूहिक रूप से रहने के लिए जल्द ही बिलनुमा घरों का निर्माण करना पड़े। यथार्थ तो यह भी है […]

आज काशी विश्वनाथ को दीप-दान करेंगे देवता

देश में अपनी तरह के अनूठे देव-दीपावली के इस आयोजन के कारण विश्वपटल पर काशी को बड़ी श्रद्धा के साथ देखा जाता हैं। वैसे तो, काशी को ‘सात बार नौ त्यौहार’ के रूप में ख्याति प्राप्त है, पर साल में एक बार कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले देव-दीपावली के इस आयोजन की बात ही कुछ […]

भोले भण्डारी- द्वितीय पाठ

नरक में ठेलम-ठेल भारतीय परम्परा में स्वर्ग का अपना महत्व है। जाने-अनजाने हर भारतीय स्वर्ग के मोहपाश में बंधकर जीवन पर्यन्त सत्कर्मों के इर्द-गिर्द ही अपना जीवन व्यतीत कर रहा होता है। अगर भूले से कोई पाप हो भी जाए, तो मनुष्य जीवनकाल में ही उसका प्रायश्चित करना ज्यादा श्रेयकर मानता है। इसके विपरीत नरक […]