बतकही: महिला-पुरुष बराबरी!

बहुत दिन हुए प्रिय सहेली से मुलाकात को, सो मेरे कदम ‛महिला दिवस’ के रोज आपोआप उसके घर की ओर बढ़ गए। वैसे भी, बधाई तो देना बनता ही था, साथ ही महिलाओं के समानता के अधिकार को लेकर आज (8 मार्च) चर्चा किए बिना दिवस अधूरा ही गुजर जाता। तो, मैंने भी अपने बढ़ते […]

भोले भण्डारी- सप्त पाठ

उड़ गए तोते देश के राजनीतिक वांग्मय में अनादि काल से ही शकुन-अपशकुन, जादू-टोने, और टोटकों का बोलबाला रहा है। त्रेता युग के यशस्वी राजा राम भी इससे अछूते नहीं थे। रामायण में ढेरों ऐसे आख्यान हैं, जिनमें मुख्यतः बाई आँख का फड़फड़ाना, खाली घड़ों का मार्ग में मिलना इत्यादि है। अब जब प्रभु ही […]

भोले भण्डारी- षष्ठः पाठ

अंधेर नगरी, चौपट राजा “अपना देश बेशक महान है, सौ में से निन्यान्वे बईमान हैं…” ये फिल्मी डॉयलॉग देश और देशवासियों के साथ कुछ ऐसा चिपका है कि सालों से सत्ता परिवर्तन के बावजूद ईमानदारी की शीतल बयार देश में बहने का नाम ही नहीं ले रही है। अपने शासन के चरम पर किसी प्रधानमंत्री […]

भोले भण्डारी- पंचम पाठ

आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास देश में हर कोई अपने काम से असंतुष्ट है। रोजमर्रा की भागम-दौड़ और दो जून की रोटी कमाने में सभी के पसीने छूट जाते हैं। ऐसे में, जब हर तरफ देश की अव्यवस्था ने लोगों का जीना दूभर कर रखा है, केवल कुछ लोग इस धरातल पर […]

नहि कोउ अस जनमा जग माहीं…

चुनाव चाहे विधानसभा का हो, लोकसभा का या वार्ड जैसी छोटी इकाई का। बहुत सिरदर्द का काम है, खासकर खासमखास यानी वीवीआईपी-दुर्लभ जीवों के लिए। जिन्होंने पांच साल अपनी सुख-सुविधाओं की बढ़ोतरी पर ध्यान लगाया, चमचों के उत्थान पर गौर किया और सिर्फ सुखद स्वप्न लोक का विचरन किया, उन्हें अचानक पहाड़ खोद चुहिया निकालने […]

भोले भण्डारी- चतुर्थ पाठ

‘नाच न जाने आंगन टेढ़ा’ भारतीय जीवन में भाग्य का इतना महत्व है कि इसके बिना आम हिन्दुस्तानी के जीवन की परिकल्पना ही नहीं की जा सकती। मरना-जीना, सुख-दुख, लाभ-हानि, सोना-जागना सभी भाग्य भरोसे ही तो होता है। भारत की मूल अवधारणा के सबसे निकट किसान और उसकी खेती से इस भाग्य का तो चोली- […]

भोले भण्डारी- तृतीय पाठ

शाम-दाम-दंड-भेद वैसे तो, देश के कोने-कोने में लोगों का जमावड़ा इतना अधिक हो गया है कि अब कुछ दिनों बाद हमें भी चीटियों की जमात में शामिल किया जा सकता है। हो सकता हैं कि हमें सामूहिक रूप से रहने के लिए जल्द ही बिलनुमा घरों का निर्माण करना पड़े। यथार्थ तो यह भी है […]