काशी सत्संग : किसान से ठगी!

एक गरीब किसान के पास एक छोटा-सा खेत और एक बैल था। बड़े परिश्रम से किसान ने डेढ़ सौ रुपये एकत्र किए और एक और बैल पशु हाट से खरीद लिया। रास्ते में लौटते समय उसे चार लड़के मिले, जिन्होंने उससे बैल खरीदना चाहा। किसान ने सोचा कि यदि बैल की अधिक कीमत मिल गए, […]

काशी सत्संग : रूप या गुण

सम्राट चंद्रगुप्त ने एक दिन अपने प्रतिभाशाली मंत्री चाणक्य से कहा, ‘कितना अच्छा होता कि तुम अगर रूपवान भी होते।’चाणक्य ने उत्तर दिया, “महाराज रूप तो मृगतृष्णा है। आदमी की पहचान तो गुण और बुद्धि से ही होती है, रूप से नहीं।”“क्या कोई ऐसा उदाहरण है, जहां गुण के सामने रूप फीका दिखे’ चंद्रगुप्त ने […]

काशी सत्संग : अंतिम प्रयास

एक समय की बात है, एक राज्य में एक प्रतापी राजा राज करता था। एक दिन उसके दरबार में एक विदेशी आगंतुक आया और उसने राजा को एक सुंदर पत्थर उपहार स्वरूप प्रदान किया।राजा वह पत्थर देख बहुत प्रसन्न हुआ. उसने उस पत्थर से भगवान विष्णु की प्रतिमा का निर्माण कर उसे राज्य के मंदिर […]

काशी सत्संग : अकेला शेर

एक जंगल में एक शेर था, जो बहुत कुशल शिकारी था। धीरे-धीरे उसे अपनी काबिलियत का घमंड होने लगा। एक दिन शेर ने अपने साथियों से कहा, “आज से जो भी शिकार होगा, उसे सबसे पहले मैं खाऊंगा, उसके बाद ही तुममे से कोई उसे हाथ लगाएगा।”शेर के मुंह से ऐसी बातें सुन सभी अचंभित […]

काशी सत्संग : मौन मछलियां

एक मछलीमार कांटा डाले तालाब के किनारे बैठा था। काफी समय बाद भी कोई मछली कांटे में नहीं फंसी, न ही कोई हलचल हुई, तो वह सोचने लगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मैंने कांटा गलत जगह डाला है, यहां कोई मछली ही न हो !यह सोचकर उसने तालाब में झांका, तो देखा कि […]

काशी सत्संग : मौत का भय

दो उल्लू एक वृक्ष पर आ कर बैठे थे। एक ने अपने मुंह में सांप को दबोच रखा था और दूसरे उल्लू ने मुंह में एक चूहा दबा रखा था। दोनों वृक्ष पर पास—पास बैठे थे। सांप ने चूहे को देखा, तो वह यह भूल ही गया कि वह उल्लू के मुंह में है और […]

काशी सत्संग : परमात्मा से बीमा

दो मित्र थे, बड़े परिश्रमी और मेहनती। अपने परिश्रम से दोनों एक दिन बड़े सेठ बन गए। दोनों ने बड़ा व्यवसाय खड़ा कर लिया। पहले सेठ ने अपनी सारी संपत्ति का बीमा करवा लिया। उसने अपने मित्र को बार-बार यही परामर्श दिया, परंतु दूसरे मित्र ने उसकी बात को अनसुना कर दिया। दुर्भाग्य से एक […]

काशी सत्संग : परमात्मा का द्वार

एक बार एक पुत्र अपने पिता से रूठ कर घर छोड़ के दूर चला गया और फिर इधर-उधर यू ही भटकता रहा। दिन बीते, महीने बीते और साल बीत गए!एक दिन वह बीमार पड़ गया। अपनी झोपड़ी में अकेले पड़े हुए उसे अपने पिता के प्रेम की याद आई, कि कैसे उसके पिता उसके बीमार […]

काशी सत्संग : ध्यान का पंख

बहुत समय पहले की बात है, एक राजा को किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किए। राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे, तो उन्होंने बाजों की देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया।कुछ समय पश्चात जब दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे, तो एक दिन […]

काशी सत्संग : नौकर को कोड़े!

पुराने समय की बात है। एक राजा के महल में उसके शयन कक्ष की सफाई करने वाला नौकर एक दिन राजा का बिस्तर ठीक कर रहा था। मुलायम बिस्तर को छूकर नौकर के मन में बिस्तर पर लेटकर देखने का लालच जागा। नौकर ने कक्ष के चारों और देख कर इत्मीनान कर लिया कि कोई […]