काशी सत्संग : अंगूठी की कीमत

एक नौजवान शिष्य ने एक दिन अपने गुरु से प्रश्न किया, “गुरुजी एक बात समझ नहीं आती, आप इतने साधारण वस्त्र क्यों पहनते हैं! आपके वस्त्र देख कर लगता ही नहीं कि आप एक ज्ञानी व्यक्ति हैं, जो सैकड़ों शिष्यों को शिक्षित करने का महान कार्य करता है?”गुरुजी मुस्कुराये, फिर उन्होंने अपनी अंगुली से एक […]

काशी सत्संग : अवसर की परख

एक बार एक ग्राहक चित्रों की दुकान पर गया। उसने वहां पर अजीब से चित्र देखें। पहले चित्र में चेहरा पूरी तरह बालों से ढका हुआ था और पैरों में पंख थे। एक दूसरे चित्र में सिर पीछे से गंजा था। ग्राहक ने पूछा,’यह चित्र किसका है?’ दुकानदार ने कहा,’अवसर का।’ग्राहक ने पूछा, ‘इसका चेहरा […]

काशी सत्संग : मां जैसा कोई नहीं

स्वामीजी से एक जिज्ञासु ने प्रश्न किया, “मां की महिमा संसार में किस कारण से गायी जाती है?” स्वामीजी मुस्कराए, उस व्यक्ति से बोले, “पांच सेर वजन का एक पत्थर ले आओ।” जब व्यक्ति पत्थर ले आया, तो स्वामीजी ने उससे कहा, “अब इस पत्थर को किसी कपड़े में लपेटकर अपने पेट पर बांध लो […]

काशी सत्संग : बुराई का अंत

एक बाज एक सांप को अपने पंजे में दबाए आसमान की ओर उड़ रहा था। सांप अचानक पंजे से छूट गया और कुंए में जा गिरा। बाज ने उसे निकालने की बहुत कोशिश की आखिर थक कर वहां से चला गया। सांप की नजर तभी कुंए में मौजूद बड़े-बड़े मेंढकों पर पड़ी। सांप एक सूखे चबूतरे […]

काशी सत्संग : समस्या नतमस्तक

एक प्रसिद्ध वक्ता एक बार एक सरोवर के किनारे चले जा रहे थे। वे किसी गंभीर चिंतन में उलझे हुए थे। सरोवर से कुछ ही दूरी पर पेड़ों का समूह था, जिस पर कई बंदर रहा करते थे। बंदरों के झुंड ने वक्ता को देखा तो वे उन्हें डराने के लिए उनकी तरफ बढ़े। जब […]

काशी सत्संग : मैं न होता, तो…

“अशोक वाटिका” में जिस समय रावण क्रोध में भरकर, तलवार लेकर, सीता मां को मारने के लिए दौड़ पड़ा, तब हनुमानजी को लगा, कि इसकी तलवार छीन कर, इसका सर काट लेना चाहिये! किंतु, अगले ही क्षण, उन्होंने देखा “मंदोदरी” ने रावण का हाथ पकड़ लिया ! यह देखकर वे गदगद हो गये! वे सोचने […]

घुमक्कड़ साथी

हर ठौर गुजरी आहिस्ते सेहंसती-खिलखिलाती रुककर खींचती अंगड़ाइयां लेते‘सिफ़र’ कई और सफर है तुझी से रूबरूसाथ ही रहना ऐ जिंदगी; हमसफ़र बनकर… ‘मिर्जापुर’ बड़ा ही दिलचस्प जिला है; बनारस से लगभग 60 किमी दक्षिण-पश्चिम में मां गंगा के किनारे बसा मुख्य शहर और बीहड़ पहाड़ियों में छोटे-बड़े बसे अनगिनत बस्तियों वाला। चट्टानों से अठखेलियां करते […]

मौनी अमावस्या पर बनिए मुनि

कल यानि 11 फरवरी, 2021 को मौनी अमावस्‍या है। इस वर्ष ग्रहों का दुर्लभ संयोग बनने के कारण इसका महत्व को कई गुणा बढ़ गया है। मौनी अमावस्या के दिन श्रवण नक्षत्र में चंद्रमा और 6 ग्रह मकर राशि में होने से महायोग बनेगा। इस तिथि पर गंगा मइया के पवित्र जल में डुबकी और […]

काशी सत्संग : अभिमान अक्ल का दुश्मन

एक घर के मुखिया को यह अभिमान हो गया कि उसके बिना उसके परिवार का काम नहीं चल सकता। उसकी छोटी सी दुकान थी। उससे जो आय होती थी, उसी से उसके परिवार का गुजारा चलता था। चूंकि कमाने वाला वह अकेला ही था, इसलिए उसे लगता था कि उसके बगैर कुछ नहीं हो सकता।एक […]

काशी सत्संग : बुरी आदत

एक अमीर आदमी अपने बेटे की किसी बुरी आदत से बहुत परेशान था| वह जब भी बेटे से आदत छोड़ने को कहते तो एक ही जवाब मिलता, “अभी मैं इतना छोटा हूं, धीरे-धीरे ये आदत छोड़ दूंगा !” पर वह कभी भी आदत छोड़ने का प्रयास नहीं करता।उन्हीं दिनों एक महात्मा गांव में पधारे हुए […]