काशी सत्संग : मन का मनन

एक दिन शहर के सेठ की कोठी के दरवाजे पर एक भिखारी भिक्षा मांगने के लिए पहुंच गया। भिखारी ने दरवाजा खटखटाया, सेठजी बाहर आए लेकिन उनकी जेब में देने के लिए कुछ न निकला। वे कुछ दुखी होकर घर के अंदर गए और एक बर्तन उठाकर भिखारी को दे दिया। भिखारी के जाने के […]

काशी सत्संग : विजेता मेंढक

बहुत समय पहले की बात है एक सरोवर में बहुत सारे मेंढक रहते थे। सरोवर के बीचो-बीच एक बहुत पुराना धातु का खंभा भी लगा हुआ था, जिसे उस सरोवर को बनवाने वाले राजा ने लगवाया था। खंभा काफी ऊंचा था और उसकी सतह भी बिलकुल चिकनी थी। एक दिन मेंढकों के दिमाग में आया […]

काशी सत्संग : निश्छल मन

एक गांव में शिवदत्त नामक जमींदार रहता था। उसने घर का और बाग का काम करने के लिए एक नौकर रामू रखा था। जमींदार बहुत कठोर हृदय वाला दयाहीन इंसान था। एक दिन रामू देर से आया, तो जमींदार ने कहा- क्या रे, अब आया है काम पर। इस तरह देर से आएगा तो काम […]

काशी सत्संग : ज्ञानी पुरुष और निंदा

एक व्यापारी एक नया व्यवसाय शुरू करने जा रहा था, लेकिन आर्थिक रूप से मजबूत न होने के कारण उसे एक हिस्सेदार की जरूरत थी। कुछ ही दिनों में उसे एक अनजान आदमी मिला और वह हिस्स्सेदार बनने को तैयार हो गया। व्यापारी को उसके बारे में ज्यादा कुछ मालुम नहीं था। अत: पहले वह […]

काशी सत्संग : क्षमा का महत्व

एक सेठजी ने अपने दामाद को तीन लाख रुपये व्यापार के लिए दिए। उसका व्यापार बहुत अच्छा जम गया, लेकिन उसने रुपये ससुरजी को नहीं लौटाए। आखिर दोनों में झगड़ा हो गया विवाद इतना बढ़ा कि दोनों का एक-दूसरे के यहां आना-जाना बंद हो गया। घृणा व द्वेष का आंतरिक संबंध अत्यंत गहरा हो गया। […]

काशी सत्संग : पेड़ का इनकार

एक बड़ी सी नदी के किनारे कुछ पेड़ थे, जिसकी टहनियां नदी के धारा के ऊपर तक भी फैली हुई थीं। एक दिन एक चिड़ियों का परिवार अपने लिए घोसले की तलाश में भटकते हुए उस नदी के किनारे पहुंच गया। चिड़ियों ने एक अच्छा सा पेड़ देखा और उससे पूछा, “हम सब काफी समय […]

हिंदुओं जैसी थी इस्लाम या ईसाई धर्म की पूजा पद्धति!

अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास पर विशेष ऐसे समय जब अयोध्या ही नहीं, बल्कि पूरा देश राममय हो गया है। पूरी दुनिया में हिंदू राममय होकर ख़ुशी मना रहे हैं। राम की नगरी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का शिलान्यास हो चुका है। ऐसे भव्य अवसर पर यह जानना भी ज़रूरी है कि इस्लाम […]

काशी सत्संग : कीमती पत्थर

एक युवक कविताएं लिखता था, लेकिन उसके इस गुण का कोई मूल्य नहीं समझता था। घरवाले भी उसे ताना मारते रहते कि तुम किसी काम के नहीं, बस कागज काले करते रहते हो। उसके अंदर हीन-भावना घर कर गई। उसने एक जौहरी मित्र को अपनी यह व्यथा बताई। जौहरी ने उसे एक पत्थर देते हुए […]

काशी सत्संग : अनुभवी संदेश

एक युवा युगल के पड़ोस में एक वरिष्ठ नागरिक युगल रहते थे, जिनमें पति की आयु लगभग अस्सी वर्ष थी और पत्नी की आयु उनसे लगभग पांच वर्ष कम थी। युवा युगल उन वरिष्ठ युगल से बहुत अधिक लगाव रखते थे और उन्हें दादा-दादी की तरह सम्मान देते थे। हर रविवार वह उनके घर उनके […]

मेरे भइया, मेरे चंदा, मेरे अनमोल रतन…

रक्षाबंधन पर विशेष मेरे भइया, मेरे चंदा, मेरे अनमोल रतन… हिंदी सिनेमा में राखी यानी रक्षाबंधन को लेकर बहुत भावुक और दिल को छू लेने वाले कई लोकप्रिय गीत फ़िल्माए गए हैं। 1965 में रिलीज ‘काजल’ फ़िल्म का साहिर लुधियानवी का लिखा और रवि की धुन पर आशा भोसले का गाया यह गाना बेमिसाल अदाकारा […]