मेरे भइया, मेरे चंदा, मेरे अनमोल रतन…

रक्षाबंधन पर विशेष मेरे भइया, मेरे चंदा, मेरे अनमोल रतन… हिंदी सिनेमा में राखी यानी रक्षाबंधन को लेकर बहुत भावुक और दिल को छू लेने वाले कई लोकप्रिय गीत फ़िल्माए गए हैं। 1965 में रिलीज ‘काजल’ फ़िल्म का साहिर लुधियानवी का लिखा और रवि की धुन पर आशा भोसले का गाया यह गाना बेमिसाल अदाकारा […]

काशी सत्संग : पूर्ण श्रद्धा

गरीबी से जूझती सरला दिन-ब-दिन परेशान रहने लगी थी। भगवान के प्रति उसे असीम श्रद्धा थी और नित नेम करके ही वह दिन की शुरुआत करती थी। आज भी नहा-धोकर घर की पहली मंजिल पर बने पूजाघर में जाकर उसने श्रद्धा के साथ धूपबत्ती की और कल रात जो उसके पति को तनख्वाह मिली थी, […]

मुलायम सिंह-साधना गुप्ता की शादी की धुरी थे अमर सिंह

अमर सिंह को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अपने हाईप्रोफाइल कनेक्शन के चलते हमेशा चर्चा में रहने वाले राज्यसभा सदस्य ठाकुर अमर सिंह गजब के लड़ाकू और ज़िंदादिल तबियत के इंसान थे। दोस्ती तो वह बड़ी शिद्दत से निभाते थे। मुलायम सिंह यादव से लेकर अमिताभ बच्चन तक, अनिल अंबानी से लेकर कुमार मंगलम बिड़ला तक से उनके […]

काशी सत्संग : जीवन सुफल या व्यर्थ

एक बार एक किसान जंगल में लकड़ी बीनने गया, तो उसकी नजर एक लोमड़ी पर पड़ी। लोमड़ी के दो पैर नहीं थे, फिर भी वह खुशी-खुशी घसीट कर चल रही थी। किसान सोचने लगा, “यह कैसे जिंदा रहती है, जबकि किसी शिकार को भी नहीं पकड़ सकती।” किसान अभी सोच ही रहा था कि उसने […]

काशी सत्संग : गुरु कृपा

एक संत रोज अपने शिष्यों को गीता पढ़ाते थे। सभी शिष्य इससे खुश थे, लेकिन एक शिष्य चिंतित दिखा। संत ने उससे इसका कारण पूछा। शिष्य ने कहा- गुरुदेव, मुझे आप जो कुछ पढ़ाते हैं, वह समझ में नहीं आता, मैं इसी वजह से चिंतित और दुखी हूं। गुरु ने कहा- कोयला ढोने वाली टोकरी […]

काशी सत्संग : कर्म भोग

एक गांव में एक किसान रहता था, उसके परिवार में उसकी पत्नी और एक लड़का था। कुछ सालों के बाद पत्नी की मृत्यु हो गई। उस समय लड़के की उम्र दस साल थी। किसान ने दूसरी शादी कर ली। उस दूसरी पत्नी से भी किसान को एक पुत्र प्राप्त हुआ। किसान की दूसरी पत्नी की […]

काशी सत्संग : निस्वार्थ प्रेम

सुबह सूर्योदय हुआ ही था कि एक वयोवृद्ध डॉक्टर के दरवाजे पर आकर घंटी बजाने लगा। सुबह-सुबह कौन आ गया? कहते हुए डॉक्टर की पत्नी ने दरवाजा खोला। वृद्ध को देखते ही डॉक्टर की पत्नी ने कहा, दादा आज इतनी सुबह? क्या परेशानी हो गई आपको? वयोवृद्ध ने कहा मेरे अंगूठे के टांके कटवाने आया […]

काशी सत्संग : बुद्धिमान की संगत

आइंस्टीन के ड्राइवर ने एक बार आइंस्टीन से कहा- “सर, मैंने हर बैठक में आपके द्वारा दिए गए हर भाषण को याद किया है।” आइंस्टीन हैरान !! उन्होंने कहा- “ठीक है, अगले आयोजक मुझे नहीं जानते। आप मेरे स्थान पर वहां बोलिए और मैं ड्राइवर बनूंगा। ऐसा ही हुआ, बैठक में अगले दिन ड्राइवर मंच […]

काशी सत्संग : चिल्लाओ मत

एक संन्यासी अपने शिष्यों के साथ गंगा नदी के तट पर नहाने पहुंचा। वहां एक ही परिवार के कुछ लोग अचानक आपस में बात करते-करते एक-दूसरे पर क्रोधित हो उठे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे। संन्यासी यह देख तुरंत पलटा और शिष्यों से पूछा, ‘क्रोध में लोग एक-दूसरे पर चिल्लाते क्यों हैं?’ शिष्य कुछ देर […]

काशी सत्संग : परख

एक जौहरी के निधन के बाद उसका परिवार संकट में पड़ गया। खाने के भी लाले पड़ गए। एक दिन उसकी पत्नी ने अपने बेटे को नीलम का एक हार देकर कहा- बेटा, इसे अपने चाचा की दुकान पर ले जाओ। कहना इसे बेचकर कुछ रुपये दे दें। बेटा वह हार लेकर चाचा जी के […]