काशी सत्संग: ज्ञान प्रदर्शन!

एक व्यक्ति दुनिया घूमकर आया और बड़ी-बड़ी बातें करने लगा। जो भी उसके पास जाता, तो वह उससे कई प्रश्न किया करता। जब यह बात गौतम बुद्ध को पता चली, तो वह वेश बदलकर उस व्यक्ति के पास पहुंचे। उस व्यक्ति ने उनसे प्रश्न किया। ‘कौन हो तुम? कहीं ब्राह्मण तो नहीं।’ बुद्ध ने उत्तर […]

काशी सत्संग: भक्त की भावना

एक गांव में एक पंडित जी रहते थे। किसी गांव में जाकर एक बार वो कथा सुना रहे थे। प्रसंग में श्रीकृष्ण जी के ऐश्वर्य जीवन और उनके विलक्षण आभूषणों का वर्णन का पाठ चल रहा था। वहां कई श्रोता पंडितजी की कथा सुन रहे थे। उनमें से एक डाकू भी था। जब पंडितजी घर […]

काशी सत्संग: मन मातंग

एक संत थे, बड़े तपस्वी और बहुत संयमी। लोग उनके धैर्य की प्रशंसा करते थे। एक दिन उनके मन में विचार आया कि उन्होंने खान-पान पर तो संयम कर लिया, लेकिन दूध पीना उन्हें बहुत प्रिय था। उसे त्याग करने के बारे में मन बनाया। इस तरह संत ने दूध पीना छोड़ दिया। सभी लोगों […]

काशी सत्संग: अंधकार की दुविधा

एक बार अंधकार ने भगवान के पास जाकर शिकायत की, ‘भगवान ये सूर्य मेरे पीछे बुरी तरह पड़ा है। मैं इससे बहुत परेशान हूं। यह व्यर्थ ही मेरा पीछा करता रहता है। मैं थोड़ी देर के लिए भी विश्राम नहीं कर पाता हूं। सदियों से ऐसा ही चलता आ रहा है।’ अंधकार की बात सुनकर […]

काशी सत्संग: सफलता की छटपटाहट

महान दार्शनिक सुकरात से एक बार एक युवक मिला। उसने सफलता पाने का उपाय पूछा। सुकरात ने उसे अगले दिन आने के लिए कहा। अगले दिन युवक ने फिर से वही सवाल पूछा, तो सुकरात ने उसे फिर से अगले दिन आने को कहा। कई महीने बीत जाने के बाद भी लड़का रोज आता और […]

काशी सत्संग : विनम्रता क्यों!

एक संत अपने शिष्य के साथ जंगल में जा रहे थे। ढलान पर से गुजरते वक्त अचानक शिष्य का पैर फिसला और वह तेजी से नीचे की ओर लुढ़कने लगा। वह खाई में गिरने ही वाला था कि तभी उसके हाथ में बांस का एक पौधा आ गया। उसने बांस के पौधे को मजबूती से […]

चैत्र नवरात्र : वर्तमान समय में क्या करें!

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।  शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते॥ इस वर्ष चैत्र नवरात्र चैत्र शुक्ल पक्ष यानी 25 मार्च से प्रारंभ होकर 2 अप्रैल अर्थात रामनवमी को समाप्त हो रहा है। इसी शुभ समय में देश में ऋतु परिवर्तित होता है और सम्पूर्ण वातावरण एक आध्यात्मिक ऊर्जा से लबरेज रहता है। शुभ मुहूर्त में नौ दिन देवी […]

काशी सत्संग: मूलमंत्र

एक प्रसिद्ध लेखक के सम्मान में एक कॉलेज के छात्रों ने भोज का आयोजन किया। उस भोज में नगर के विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। छात्रों का इतना भव्य आयोजन देखकर लेखक बहुत खुश हुए। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने कहा, ‘इस कॉलेज के छात्र बहुत उत्साही हैं। उत्साह ही सफलता की पहली […]

Fabric of dream: Banarasi silk

In the mid of 19th century, The Silk came to Varanasi with some merchants from China. It traveled a long distance from China to Europe, to Middle East, to Gujarat, finally reaching to the city of talented weavers. The merchants who brought this new thread to the city were so enthused by the patterns and […]