काशी सत्संग: श्रीराम भक्त रावण!

राम-रावण की सेना आमने-सामने थी, लक्ष्मणजी के द्वारा मारे गये मेघनाद की दाहिनी भुजा सती सुलोचना के समीप जा गिरी। सुलोचना ने कहाः ‘अगर यह मेरे पति की भुजा है, तो हस्ताक्षर करके इस बात को प्रमाणित कर दें।’ कटी भुजा ने हस्ताक्षर करके सच्चाई स्पष्ट कर दी। सुलोचना ने निश्चय किया कि ‘मुझे अब […]

काशी सत्संग: ‛दुर्जन आबाद रहें!’

एक बार एक महात्मा अपने शिष्यों के साथ एक ऐसे गांव में पहुंचे, जहां के लोग साधु-संन्यासियों को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे। कुछ ही दिन वहां रहने के बाद, जब महात्मा वहां से चलने लगे, तब गांव के लोगों ने कहा, ‘महात्माजी कुछ आशीर्वाद तो देते जाइए।’ महात्मा थोड़ी देर तक हंसते रहे, […]

काशी सत्संग: साधू या असाधू!

एक फकीर एक शहर के बस स्टैंड के पास एक वृक्ष की छाया में माला फेर रहा था, तभी एक अंग्रेज बस से उतरा। वह बाबा के पास जाकर बोला, ‘ये आपके हाथ में क्या है?’ बाबा ने अंग्रेज के कंधे पर टँगी बन्दूक की ओर देखते हुए पूछा, ‘ये क्या है?’ अंग्रेज ने कहा,’ये […]

मैं स्त्री और तुम पुरुष

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : दरिया किनारे बैठे-बैठे यकायक ये ख्याल आया तुम इन पत्थरों से ही तो हो एकदम अडिग, अहम से भरे पर मैं भी तो इन लहरों सी हूं बार-बार लौटकर आउंगी, पूछने क्या तुम जरा भी डिगे, और तुम फिर दोगुने अहम के साथ मुझे ढकेल दोगे और मैं लौट जाऊंगी, […]

काशी सत्संग: बुरे का बुरा नतीजा

एक गांव में एक वैद्य रहता था। दवा लेने के लिए कई लोग उसके पास आते रहते, लेकिन एक दफा उसकी दवा के खाने से दो-तीन लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद कोई व्यक्ति उस वैद्य से इलाज करवाने नहीं आता था। ऐसे में, वैद्य को भूखे ही सोना पड़ता था। एक […]

काशी सत्संग: पवित्र स्पर्श से सुधरी सेहत

यह कहानी उन दिनों की है, जब विश्व युद्ध चल रहा था। ‘प्रिंस ऑफ वेल्स’ एडवर्ड अष्टम एक दिन युद्ध में घायल लोगों को देखने इंग्लैंड के एक निजी अस्पताल में पहुंचे। जब घायलों से मिलकर वे बाहर गेट पर आए, तो उन्होंने अस्पताल के अधिकारियों से कहा, ‘आप लोग तो घायलों की संख्या 36 […]

काशी सत्संग: बादशाह अकबर और युवती

एक बार बादशाह अकबर अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए घूमने निकले। उस समय उनके साथ चार दरबारी थे। नमाज का समय हो गया था। गांव का मार्ग छोड़कर ऐसी कोई जगह न थी, जहां नमाज पढ़ी जा सके, इसलिए मार्ग पर ही। जायेनमाज ( नमाज पढ़ने के लिए बिछाने वाली चटाई) बिछा दी […]

काशी सत्संग: संगठन की शक्ति

एक वन में बहुत बडा़ अजगर रहता था। वह बहुत अभिमानी और अत्यंत क्रूर था। जब वह अपने बिल से निकलता, तो सब जीव उससे डरकर भाग खड़े होते। उसका मुंह इतना विकराल था कि खरगोश तक को निगल जाता था। एक बार अजगर शिकार की तलाश में घूम रहा था। सारे जीव अजगर को […]

काशी सत्संग: असंभव में छुपा ‘संभव’

अदम्य उत्साह के धनी थे नेपोलियन बोनापार्ट। युद्ध करते हुए एक बार जब नेपोलियन आल्पस पर्वत के पास अपनी सेना सहित पहुंचे, तो पहाड़ ने उनका रास्ता रोक लिया। पहाड़ की तलहटी में एक वृद्धा रहती थी। रास्ते की जानकारी लेने जब नेपोलियन उसके पास पहुंचे, तो नेपोलियन की बात सुनकर वह वृद्धा हंसने लगी। […]

काशी सत्संग: स्वामीजी और वेश्या

स्वामीजी को विदेश जाने से पहले एक बार खेतड़ी (राजस्थान) जाना पड़ा, क्योंकि वहां के महाराजा की कोई संतान नहीं थी और स्वामीजी के आशीर्वाद से पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई थी। इसी की खुशी में एक उत्सव मनाया जा रहा था। दरबार में कई सामंत, प्रजाजन और कलाकार उपस्थित थे। कार्यक्रम के आखिरी में एक […]