काशी सत्संग : चिल्लाओ मत

एक संन्यासी अपने शिष्यों के साथ गंगा नदी के तट पर नहाने पहुंचा। वहां एक ही परिवार के कुछ लोग अचानक आपस में बात करते-करते एक-दूसरे पर क्रोधित हो उठे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे। संन्यासी यह देख तुरंत पलटा और शिष्यों से पूछा, ‘क्रोध में लोग एक-दूसरे पर चिल्लाते क्यों हैं?’ शिष्य कुछ देर […]

काशी सत्संग : परख

एक जौहरी के निधन के बाद उसका परिवार संकट में पड़ गया। खाने के भी लाले पड़ गए। एक दिन उसकी पत्नी ने अपने बेटे को नीलम का एक हार देकर कहा- बेटा, इसे अपने चाचा की दुकान पर ले जाओ। कहना इसे बेचकर कुछ रुपये दे दें। बेटा वह हार लेकर चाचा जी के […]

काशी सत्संग : अच्छे पिता

एक धनी व्यक्ति के बेटे ने रो-रोकर घर में कोहराम मचा रखा था। उसका नया कीमती खिलौना, रोबोट खराब जो हो गया था और उसके दूसरे सभी खिलौने पुराने हो चुके थे। नए खिलौने का तुरंत आश्वासन पाने के लिए वह बालक अब बहुत देर से अपने पिता को गुस्से से घूरे जा रहा था। […]

काशी सत्संग : पिताजी की सीख

एक किसान था, उसके दो बेटे थे, दोनों बहुत आलसी थे। किसान जब मरने वाला था, तब उसने अपने दोनों आलसी बेटों को अपने पास बुलाया। किसान ने अपने बेटों से कहा कि मेरे मरने के बाद तीन बातें हमेशा मेरी याद रखना। पहली बात की धूप में कभी भी दुकान पर नहीं जाना और […]

काशी सत्संग : मंत्री की दूरदृष्टि

एक बार की बात है, एक विशाल प्रदेश के राजा को एक दिन देश घूमने का विचार आया और उसने देश भ्रमण की योजना बनाई। जब राजा देश भ्रमण के बाद लौट कर अपने महल आया। उसने अपने मंत्रियों से पैरों में दर्द होने की शिकायत की। राजा का कहना था कि मार्ग में जो […]

काशी सत्संग : मौन की महत्ता

एक मछलीमार कांटा डाले तालाब के किनारे बैठा था। काफी समय बाद भी कोई मछली कांटे में नहीं फंसी, न ही कोई हलचल हुई तो वह सोचने लगा… कहीं ऐसा तो नहीं कि मैंने कांटा गलत जगह डाला है, यहां कोई मछली ही न हो !उसने तालाब में झांका तो देखा कि उसके कांटे के […]

काशी सत्संग : सुसंगत का फल

एक भंवरे की मित्रता गोबर में रहने वाले एक कीड़े से हो गई। एक दिन कीड़े ने भंवरे से कहा- ‘भाई तुम मेरे सबसे अच्छे मित्र हो, इसलिए मेरे यहां भोजन पर आओ!’ भंवरा भोजन के लिए मित्र के यहां पहुंचा। बाद में भंवरा सोच में पड़ गया कि मैंने बुरे का संग किया, इसलिए […]

काशी सत्संग : क्षमाशीलता

भगवान बुद्ध एक गांव में उपदेश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि- “हर किसी को धरती माता की तरह सहनशील तथा क्षमाशील होना चाहिए, क्रोध ऐसी आग है, जिसमें क्रोध करने वाला दूसरों को जलाएगा तथा खुद भी जल जाएगा।”सभा में सभी शांति से बुद्ध की वाणी सुन रहे थे, लेकिन वहां स्वभाव से ही […]

काशी सत्संग : साड़ी के टुकड़े

एक नगर में एक जुलाहा रहता था। वह स्वभाव से अत्यंत शांत, नम्र तथा मिलनसार था। उसे क्रोध तो कभी आता ही नहीं था। एक बार कुछ लड़कों को शरारत सूझी। वे सब उस जुलाहे के पास यह सोचकर पहुंचे कि देखें इसे गुस्सा कैसे नहीं आता? उनमें एक लड़का धनवान माता-पिता का पुत्र था। […]

काशी सत्संग ; असली शिक्षा

एक बड़ी-सी गाड़ी आकर बाजार में रूकी। कार में बैठी महिला ने अपनी बच्ची से कहा- जा, उस बुढ़िया से सब्जी ले आ। इसके बाद बच्ची कार से उतर कर सब्जी वाली के करीब पहुंची और पूछा- ऐ बुढ़िया, फला सब्जी कैसे दी? सब्जी वाली ने उत्तर दिया- 40 रुपये किलो, बेबी जी… सब्जी लेकर […]