काशी सत्संग : स्वभाव पर वश

एक शिष्य ने अपने गुरु से पूछा, ‘मैं बहुत जल्दी क्रोधित हो जाता हूं। कृपया मुझे इससे छुटकारा दिलाएं।’गुरु ने कहा- ‘यह तो बहुत विचित्र बात है! मुझे क्रोधित होकर दिखाओ।’ शिष्य बोला, ‘अभी तो मैं यह नहीं कर सकता।’ ‘क्यों?’ गुरु बोले। शिष्य ने उत्तर दिया, ‘यह अचानक होता है।’गुरु ने कहा, ‘ऐसा है […]

काशी सत्संग : ईश्वर का पता

रात के एक बज रहे थे और सेठजी को नींद नहीं आ रही थी। वह घर में चक्कर लगाकर आखिर थक गए और कार में बैठकर शहर की सड़कों पर निकल पड़े। रास्ते में एक मंदिर दिखा, तो सोचा थोड़ी देर इस मंदिर में जाकर भगवान के पास बैठता हूं, प्रार्थना करता हूं, तो शायद […]

काशी सत्संग : विश्वास की शक्ति

एक आदमी शादी कर के अपनी पत्नी के साथ घर वापस लौट रहा था। दोनों एक बड़ी झील को नाव से पार कर रहे थे, तभी अचानक एक भयंकर तूफान आ गया! वो आदमी वीर था, किंतु उसकी पत्नी हालात को देखते हुए काफी डरी हुई थी। नाव बहुत छोटी थी और तूफान इतना विकराल […]

काशी सत्संग : एक सच्चा योद्धा

यह घटना उस समय की है, जब कोलम्बस अपनी महान यात्रा पर निकलने वाला था। चारों तरफ नाविकों में हर्षोल्लास का वातावरण था, परंतु गांव का ही एक युवक फ्रोज बहुत ही डरा हुआ था और वह नहीं चाहता था कि कोलम्बस इस यात्रा पर जाए। वह नाविकों के मन में समुद्री यात्रा के प्रति […]

काशी सत्संग : हीरे की अंगूठी

एक अमीर आदमी के बहुत सारे मित्र थे, लेकिन उनमें से एक मित्र जो काफी गरीब था, वह उसका विश्वासपात्र था। एक दिन अमीर आदमी ने अपने घर सभी मित्रों को अपने घर भोजन पर आमंत्रित किया। भोजन के बाद अमीर आदमी को ख्याल आया है कि उसकी अंगुली में जो हीरे की अंगूठी थी, […]

काशी सत्संग : पांच पत्थर

एक चोर अक्सर एक साधु के पास आता और उससे ईश्वर से साक्षात्कार का उपाय पूछा करता था। साधु हमेशा उसकी बात टाल देते, लेकिन चोर पर इसका असर नहीं पड़ता था। वह रोज उपाय जानने के लिए साधु के पास आ जाता था।एक दिन साधु ने कहा, ‘तुम्हें सिर पर कुछ पत्थर रखकर पहाड़ […]

काशी सत्संग : तीन सहारे

एक समय की बात है, एक धर्मपरायण और न्यायप्रिय शासक थे, जो वेश बदलकर अपनी प्रजा का हालचाल जानते रहते थे। एक दिन उन्हें पता चला कि उनके राज्य में रहने वाली एक महिला का पति गलत संगति में पड़ गया है और इससे नाराज होकर महिला ने अकेले रहना शुरू कर दिया है। महिला […]

काशी सत्संग : विष समान अमृत

सिकंदर उस जल की तलाश में था, जिसे पीने से अमर हो जाते हैं। दुनियाभर को जीतने के जो उसने आयोजन किए, अमृत की तलाश के लिए ही थे। काफी दिनों तक देश-दुनिया में भटकने के पश्चात आखिरकार सिकंदर ने वह जगह पा ही ली, जहां उसे अमृत की प्राप्ति होती।वह उस गुफा में प्रवेश […]

काशी सत्संग : शीशमहल

एक दिन एक शिष्य ने गुरु से पूछा, ‘गुरुदेव, आपकी दृष्टि में यह संसार क्या है?’ इस पर गुरु ने एक कथा सुनाई।‘एक नगर में एक शीशमहल था। महल की हरेक दीवार पर सैंकड़ों शीशे जड़े हुए थे। एक दिन एक गुस्सैल कुत्ता महल में घुस गया। महल के भीतर उसे सैंकड़ों कुत्ते दिखे, जो […]

काशी सत्संग : करुणामय करुणानिधि

एक बार प्रभु श्रीराम और भ्राता लक्ष्मण एक सरोवर में स्नान के लिए उतरे। उतरते समय उन्होंने अपने-अपने धनुष बाहर तट पर गाड़ दिए। जब वे स्नान करके बाहर निकले, तो लक्ष्मणजी ने देखा कि उनकी धनुष की नोक पर रक्त लगा हुआ था। उन्होंने श्रीराम से कहा, “भ्राताश्री! लगता है कि अनभिज्ञता में कोई […]