काशी सत्संग : क्षमा का महत्व

एक सेठजी ने अपने दामाद को तीन लाख रुपये व्यापार के लिए दिए। उसका व्यापार बहुत अच्छा जम गया, लेकिन उसने रुपये ससुरजी को नहीं लौटाए। आखिर दोनों में झगड़ा हो गया विवाद इतना बढ़ा कि दोनों का एक-दूसरे के यहां आना-जाना बंद हो गया। घृणा व द्वेष का आंतरिक संबंध अत्यंत गहरा हो गया। […]

काशी सत्संग : पेड़ का इनकार

एक बड़ी सी नदी के किनारे कुछ पेड़ थे, जिसकी टहनियां नदी के धारा के ऊपर तक भी फैली हुई थीं। एक दिन एक चिड़ियों का परिवार अपने लिए घोसले की तलाश में भटकते हुए उस नदी के किनारे पहुंच गया। चिड़ियों ने एक अच्छा सा पेड़ देखा और उससे पूछा, “हम सब काफी समय […]

काशी सत्संग : कीमती पत्थर

एक युवक कविताएं लिखता था, लेकिन उसके इस गुण का कोई मूल्य नहीं समझता था। घरवाले भी उसे ताना मारते रहते कि तुम किसी काम के नहीं, बस कागज काले करते रहते हो। उसके अंदर हीन-भावना घर कर गई। उसने एक जौहरी मित्र को अपनी यह व्यथा बताई। जौहरी ने उसे एक पत्थर देते हुए […]

काशी सत्संग : अनुभवी संदेश

एक युवा युगल के पड़ोस में एक वरिष्ठ नागरिक युगल रहते थे, जिनमें पति की आयु लगभग अस्सी वर्ष थी और पत्नी की आयु उनसे लगभग पांच वर्ष कम थी। युवा युगल उन वरिष्ठ युगल से बहुत अधिक लगाव रखते थे और उन्हें दादा-दादी की तरह सम्मान देते थे। हर रविवार वह उनके घर उनके […]

काशी सत्संग : पूर्ण श्रद्धा

गरीबी से जूझती सरला दिन-ब-दिन परेशान रहने लगी थी। भगवान के प्रति उसे असीम श्रद्धा थी और नित नेम करके ही वह दिन की शुरुआत करती थी। आज भी नहा-धोकर घर की पहली मंजिल पर बने पूजाघर में जाकर उसने श्रद्धा के साथ धूपबत्ती की और कल रात जो उसके पति को तनख्वाह मिली थी, […]

काशी सत्संग : जीवन सुफल या व्यर्थ

एक बार एक किसान जंगल में लकड़ी बीनने गया, तो उसकी नजर एक लोमड़ी पर पड़ी। लोमड़ी के दो पैर नहीं थे, फिर भी वह खुशी-खुशी घसीट कर चल रही थी। किसान सोचने लगा, “यह कैसे जिंदा रहती है, जबकि किसी शिकार को भी नहीं पकड़ सकती।” किसान अभी सोच ही रहा था कि उसने […]

काशी सत्संग : गुरु कृपा

एक संत रोज अपने शिष्यों को गीता पढ़ाते थे। सभी शिष्य इससे खुश थे, लेकिन एक शिष्य चिंतित दिखा। संत ने उससे इसका कारण पूछा। शिष्य ने कहा- गुरुदेव, मुझे आप जो कुछ पढ़ाते हैं, वह समझ में नहीं आता, मैं इसी वजह से चिंतित और दुखी हूं। गुरु ने कहा- कोयला ढोने वाली टोकरी […]

काशी सत्संग : कर्म भोग

एक गांव में एक किसान रहता था, उसके परिवार में उसकी पत्नी और एक लड़का था। कुछ सालों के बाद पत्नी की मृत्यु हो गई। उस समय लड़के की उम्र दस साल थी। किसान ने दूसरी शादी कर ली। उस दूसरी पत्नी से भी किसान को एक पुत्र प्राप्त हुआ। किसान की दूसरी पत्नी की […]

काशी सत्संग : निस्वार्थ प्रेम

सुबह सूर्योदय हुआ ही था कि एक वयोवृद्ध डॉक्टर के दरवाजे पर आकर घंटी बजाने लगा। सुबह-सुबह कौन आ गया? कहते हुए डॉक्टर की पत्नी ने दरवाजा खोला। वृद्ध को देखते ही डॉक्टर की पत्नी ने कहा, दादा आज इतनी सुबह? क्या परेशानी हो गई आपको? वयोवृद्ध ने कहा मेरे अंगूठे के टांके कटवाने आया […]

काशी सत्संग : बुद्धिमान की संगत

आइंस्टीन के ड्राइवर ने एक बार आइंस्टीन से कहा- “सर, मैंने हर बैठक में आपके द्वारा दिए गए हर भाषण को याद किया है।” आइंस्टीन हैरान !! उन्होंने कहा- “ठीक है, अगले आयोजक मुझे नहीं जानते। आप मेरे स्थान पर वहां बोलिए और मैं ड्राइवर बनूंगा। ऐसा ही हुआ, बैठक में अगले दिन ड्राइवर मंच […]