काशी सत्संग: पद से दूरी भली

एक समय की बात है चीनी दार्शनिक चुआंग जू नदी किनारे मछली पकड़ रहे थे। उसी दौरान राजा के एक दूत ने आकर कहा, ‘सम्राट ने आपको अपना प्रधानमंत्री नियुक्त किया है।’ चुआंग जू ने राजा के उस दूत से प्रश्न किया, ‘सुना है कि सम्राट के संग्रहालय में किसी दिव्य कछुए की ढाल सुरक्षित […]

काशी सत्संग: सहिष्णुता से हृदय परिवर्तन

दशकों पहले स्वामी दयानद गंगा नदी के किनारे रहकर चिंतन-मनन करते थे। वहां अन्य साधु भी रहते थे, जो उनकी इस साधना से ईर्ष्या करते थे। उन्हें लगता था कि दयानंद उनके प्रभाव को कम न कर दें। धीरे-धीरे अन्य साधु मिलकर दयानंद की निंदा करने लगे। ये उनका नित्य का काम हो गया था, […]

काशी सत्संग: ईमान का उद्यम

सदियों पहले यूनान में हेलाक नाम का एक सेठ रहता था। उसके पुत्र का नाम ‘चालाक’ और पुत्रवधू का नाम था ‘हेली’। हेलाक की पुत्रवधू धार्मिक प्रवृत्ति की थी, लेकिन हेलाक एक कुटिल व्यक्ति था। उसकी किराने की दुकान थी, वह अपने हर ग्राहक को ठग लेता। इसीलिए लोग उसे वंचक सेठ के नाम से […]

काशी सत्संग: परिस्थिति बदलती है, प्रकृति नहीं

एक बार भगवान बुद्ध कहीं जा रहे थे। वह पैदल यात्रा कर रहे थे, इस कारण थक कर एक पेड़ के नीचे बैठ गए। उनके साथ उनके अन्य शिष्यों के साथ आनंद भी मौजूद थे। भगवान बुद्ध ने कहा, ‘आनंद यहां नजदीक एक झरना है, वहां से जल ले आओ।’ आनंद झरने के पास पहुंचा, […]

काशी सत्संग: अलग-अलग दृष्टिकोण

कबीर की सादगी देख उनके कुछ शिष्य दुखी रहते थे। एक दिन साहस करते हुए एक शिष्य बोला, ‘गुरुवर आप सादगी से क्यों रहते हैं? आप एक सिद्ध पुरुष हैं। ऐसे में आपका कपड़ा बुनना भी अजीब है।’ कबीर थोड़ा मुस्कुराए और फिर बोले, ‘पहले मैं अपना पेट पालने के लिए बुनता था, लेकिन अब […]

काशी सत्संग: सुंदर व्यवहार का उपहार

एक राजा था। उसने एक सपना देखा। सपने में उससे एक परोपकारी साधु कह रहा था कि, बेटा! कल रात को तुम्हें एक विषैला सांप काटेगा और उसके काटने से तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी। वह सर्प अमुक पेड़ की जड़ में रहता है। वह पूर्व जन्म की शत्रुता का बदला लेना चाहता है। सुबह हुई, […]

काशी सत्संग: बहाने नहीं, अवसर खोजिए

एक गांव था। उस गांव में लोग श्रमदान से चौपाल बना रहे थे। गांव के सभी लोग काम में लगे हुए थे, लेकिन वहां एक व्यक्ति उदास खड़ा हुआ था। गांव के सरपंच ने जब यह देखा, तो वे उस व्यक्ति के पास गए। सरपंच ने उस व्यक्ति से कहा, ‘आपको काम में हाथ बंटाना […]

काशी सत्संग: सत कर्मों की सदगति

एक दिन एक व्यक्ति संत के पास गया और बोला, ‛महाराज! मुझे कोई ऐसा उपदेश दीजिए, जो जिंदगी भर याद रहे। महाराज, मेरे पास इतना समय नहीं है कि रोज आपके पास आकर घंटों बैठकर आपका उपदेश सुन सकूं।’ संत ने कहा, ‘ठीक है तो चलो मेरे साथ।’ संत उस व्यक्ति को श्मशान ले गए। […]

काशी सत्संग: एकाग्रता और सफलता

एक बार स्वामीजी अमेरिका यात्रा पर गए। एक दिन वहां उन्होंने पुल पर खड़े लड़कों को नदी में तैर रहे अंडे के छिलकों पर बंदूक से निशाना लगाते हुए देखा। उनमें से कोई भी निशाना सही जगह पर नहीं लगा पा रहा था। तब उन्होंने स्वयं एक बच्चे से बंदूक ली और निशाना लगाया। निशाना […]

काशी सत्संग: अदला-बदली में विचार असली

बात द्वापरयुग की है। अज्ञातवास में पांडव रूप बदलकर ब्रह्मणों के वेश में रह रहे थे। एक दिन उन्हें कुछ ब्राह्मण मिले। वे राजा द्रुपद की पुत्री द्रौपदी के स्वयंवर में जा रहे थे। पांडव भी उनके साथ चल दिए। स्वयंवर में पानी में देखकर ऊपर घूम रही मछली पर निशाना लगाना था। वहां मौजूद […]