ये हैं होली से जुड़ी पौराणिक कहानियां

“प्रबल प्रेम के पाले पड़कर, प्रभू को नियम बदलते देखा। आपका मान टले टल जाये, पर भक्त का मान न टलते देखा।” भगवान के इस भाव को दर्शाने वाले रंगों के त्योहार होली की काशी पत्रिका की ओर से आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं। होली यानि रंगों का त्यौहार सिर्फ एक त्यौहार न होकर झूम उठने […]

रंग-ए-बनारस

हर रंग गुलिस्तां है हर रंग शरारा है ये रंग-ए-बनारस है ये रंग-ए-करारा है जी हां, यह बनारस ही है, जिसके रग-रग में कितने रंग हैं, किसी को नहीं पता। रंगों की मशहूर दुनिया भी शायद खुद को बनारस में पाकर अपना अस्तित्व भूल जाती है, तभी तो बनारस के शिव अपने बनारसियों में ही […]

काशी में ‛शिव’ की होली

भस्म और ‛गुलाल में सराबोर होंगे विश्वनाथ खान-पान, वार-त्यौहार…हर बात में जगत से भिन्न शिव की नगरी ‛काशी’ की ‛होली’ भी कुछ हटके ही है। रंगभरी एकादशी पर गौरी-शिव संग जमकर होली खेलने के बाद ही काशी में होली का हुड़दंग शुरू होता है। इतना ही नहीं रंगभरी एकादशी के ठीक दूसरे दिन बाबा भोलेनाथ […]

स्त्री ! तुम क्यों हो..?

भारत-पाकिस्तान, मोदी-राहुल, चुनाव, गठबंधन-राजनीति और जाने क्या-क्या.. दुनिया भर की कचर-पचर से त्रस्त यह अनपढ़ मन अरसे बाद आज कुछ लिखने को कुलबुलाया। हाथों में कलम लिए विचारों में शुमार अंतस की कुलबुलाहट शांत करने को विषय भी चाहिए था, सो हो लिए बनारस की यादों में गुम उसी बनारसी फक्कड़पन के वैचारिक गोद में। […]

महाशिवरात्रि : हर-हर बोल रहा है काशी

युग-युगांतर से भगवान भोलेनाथ की परमप्रिय काशी की थाती है महाशिवरात्रि। जी हां, यूं तो समूचा विश्व महाशिवरात्रि मनाता है, पर काशी की शिवरात्रि काशी के वासी बाबा विश्वनाथ को बेहद प्रिय है। अघोरी शिवगणों की बारात में दूल्हा बने विश्वनाथजी भस्म-भभूत से नहाए पथ पर बड़ी शान से देवी पार्वती का वरण करने निकलते […]

जय हिंद की सेना

एक बार फिर हमने साबित कर दिया कि हम भारत हैं और हमारी ओर उठने वाली हर नापाक नजर हमेशा के लिए सुला दी जाएगी। कुछ ऐसा ही हुआ पुलवामा हमले के ठीक 12 दिन बाद, जब हमने पीओके में घुसकर हर उस चिंगारी को बुझा दिया जो हमारे घर को जलाने की तैयारी में […]

इश्क-ए-वतन में जां-कुर्बान

कश्मीर की धरती पर शहीद हुए बनारस के लाल

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने जहां पूरे देश को झकझोर दिया, वहीं अपने बनारस के दो लाल भी शहीदों की टोली में शामिल हो गए। आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 44 जवान शहीद हो गए, जिनमें 10 यूपी से मातृभूमि की रक्षा को मुस्तैद थे। इस दुर्दांत घटना में दर्जनों जवान घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर है। फौरी तौर पर आई सूचना के तहत हमले की जिम्मेदारी आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने ली है।
काल के कपाल पर..
एक तरफ देश जहां मुहब्बत के पर्व को जी रहा था, तो दूसरी तरफ वतन से इश्क करने वाले जवान काल के कपाल पर कुछ लिख-मिटा रहे थे। जी हां, 14 फरवरी की सुबह तो मुस्कान में लिपटी थी लेकिन शाम होते ही मनहूस स्याह सी खबर आई कि जम्मू से श्रीनगर जा रही सीआरपीएफ की 70 गाड़ियों के काफिले पर आतंकी हमला किया गया है। इस काफिले में करीब 2500 से ज्यादा जवान शामिल थे। सीआरपीएफ जवानों के काफिले पर विस्फोटकों से भरी गाड़ी को टकराकर इस आत्मघाती हमले को अंजाम दिया गया। पिछले तीन दशक में जम्मू कश्मीर में हुए आतंकी हमलों में यह हमला सबसे बड़ा आतंकी हमला है।
जुबां नहीं, जमीर जगाओ..
इस हमले की न केवल देश भर में भर्त्सना की गई, बल्कि विदेशों ने भी कड़ी निंदा की है। अमेरिका और रूस सहित कई देशों ने इस आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंक के खिलाफ भारत की लड़ाई में साथ देने का वादा किया है। हालांकि, पाकिस्तान ने भी घटना से अपना पल्ला झाड़ते हुए आतंकवाद की निंदा की है। एक आधिकारिक बयान में भारतीय मीडिया की रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए पाकिस्तान ने कहा है इस घटना से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
आरोप-प्रत्यारोप से परे सच यह है कि देश के दर्जनों घरों के चिराग बुझ गए और तमाम सपूत देश की आन-बान-शान में न्यौछावर हो गए। इनमें यूपी के भी लगभग दर्जन भर जवान शामिल हैं, जिनमें आधे पूर्वांचल से हैं। बनारस के शहीद रमेश यादव और मुगलसराय के शहीद अवधेश कुमार यादव के घर में गुरुवार की शाम कहर बनकर टूटी। दोनों ही परिवार अपने लाडले के छुट्टियों पर लौटने का इंतजार कर रहे थे। उन्हें क्या पता था कि उनके घर का चिराग देश रक्षा के लिए खुद की शपथ को अपने खून से सींचकर निभा रहा है।
किसके निशाने पर कौन !
पुलवामा हमले में यूपी के जो 10 जवान शहीद हुए, उनमें वाराणसी के शहीद रमेश यादव, चंदौली में मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के बहादुपुर गांव निवासी शहीद अवधेश कुमार यादव हैं। इनके साथ हमकदम रहे इलाहाबाद के शहीद महेश, देवरिया के शहीद विजय मौर्या, शामली के शहीद प्रदीप, शहीद अमित कुमार। इनके अलावा आगरा के शहीद कौशल कुमार यादव, उन्नाव के शहीद अजीत कुमार, कानपुर के शहीद श्यामबाबू और कन्नौज के शहीद प्रदीप सिंह भी उसी बस में सवार थे, जिसे आतंकियों ने निशाना बनाया।
आतंक तुम कब जाओगे !
ताजा आतंकी हमलों पर जुबानी जंग जरूर तेज हो गई है। सरकार अपना सरकारी फर्ज निभा रही है, तो नेताजी लोग अपने बयान से आतंकवाद की लानत-मलानत कर रहे हैं। इन सबके बीच मूल प्रश्न जस का तस है कि आखिर कब तक आतंकवाद से यह लड़ाई चलेगी और कितनी जानें शहादत झेलेंगी। आखिर कब खत्म होगी आतंक का रास्ता छोड़ देने की जिद। ऐ मेरे वतन के शहीदों, तुम्हें काशी पत्रिका का शत शत नमन, तुम्हारे परिजन के साथ काशी पत्रिका गहरी संवेदना रखता है।

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काशी सत्संग: माया मरी, न मन मरा…

ऐसा कहते हैं कि नानक देव जी जब आठ वर्ष के थे तब पहली बार अपने घर से अकेले निकल पड़े। सब घर वाले और पूरा गांव चिंतित हो गया। तब शाम को किसी ने नानक के पिता कालू मेहता को खबर दी कि नानक तो शमशान घाट में शांत बैठा है। सब दौड़े और […]

आस्था की महाडुबकी

सत्यं नास्ति तपः शौचं, दया दानं न विद्यते। उदरम्भरिणो जीवा, वराकाः कूटभाषिणः।। इस युग में सत्य खो रहा है, तपस्या लुप्तप्राय हो गई है, शुद्धता भी नगण्य है, दया-धर्म और दान लोगों से दूर हो गए हैं। आज का मनुष्य सिर्फ और सिर्फ अपना पेट भरने में लगा है, बहुत आलसी हो गया है और […]

दिन, महीने, साल.. गुजरते जाएंगे..

वक्त की घड़ियां कभी थमतीं नहीं ये अलग बात है धड़कन थम जाए जी हां, 31 दिसंबर की रात ठीक 12 बजे जैसे ही घड़ी की दो सूइयों का संगम हुआ, प्रहर के पहरे ने कलेंडर बदल लिया। धड़कनों की रफ्तार ने भी जिंदगी से एक धड़कन कम कर अगले वर्ष में छलांग लगा दी। […]