काशी सत्संग : विनम्रता क्यों!

एक संत अपने शिष्य के साथ जंगल में जा रहे थे। ढलान पर से गुजरते वक्त अचानक शिष्य का पैर फिसला और वह तेजी से नीचे की ओर लुढ़कने लगा। वह खाई में गिरने ही वाला था कि तभी उसके हाथ में बांस का एक पौधा आ गया। उसने बांस के पौधे को मजबूती से […]

चैत्र नवरात्र : वर्तमान समय में क्या करें!

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।  शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते॥ इस वर्ष चैत्र नवरात्र चैत्र शुक्ल पक्ष यानी 25 मार्च से प्रारंभ होकर 2 अप्रैल अर्थात रामनवमी को समाप्त हो रहा है। इसी शुभ समय में देश में ऋतु परिवर्तित होता है और सम्पूर्ण वातावरण एक आध्यात्मिक ऊर्जा से लबरेज रहता है। शुभ मुहूर्त में नौ दिन देवी […]

बुराइयों का दहन : होलिका

होलिका विशेष अधर्म, अज्ञान, अभिमान… यानी बुराइ पर अच्छाई की जीत, हमारे त्यौहार भी इसी ओर इशारा करते हैं। फाल्गुन का महीना है, तो बच्चों के हाथ में पिचकारी और बाकियों के मन में उल्लास है…ऐसे में, चर्चा करते हैं होलिका की : सबसे पहले बात कर लें, होलिका दहन और होली के शुभ मुहूर्त […]

अमंगलकारी होलाष्टक

होली और अष्टक के संयोग से बने शब्द ‘होलाष्टक’ का अर्थ है, होली से पहले के आठ दिन, यानी फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर फाल्गुन की पूर्णिमा तक का समय। पूर्णिमा की रात को ही होलिका दहन करने की परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक के दौरान किसी भी शुभ काम को करने की मनाही […]

शिव और शिवा का संयोग महाशिवरात्रि

बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में आज महापर्व महाशिवरात्रि का अवसर है और भोलेपन में लिपटा काशी-वासियों का बनारसीपन पूरे भक्ति-भाव से महादेव को मगन रखने और बाबा का बाराती बनने को आतुर है। इस बार महाशिवरात्रि कई मायनों में खास है। दुर्लभतम नक्षत्र संयोग वाले इस महापर्व पर न केवल बाबा विश्वनाथ का श्रृंगार […]

दिहबे अरघिया घाट हम जाइके…

भारतीय संस्कृति अपनी विविधता और सप्तरंगों के कारण प्राचीन काल से ही विश्व को आकर्षित करती रही है। आज भी इसने अपनी परम्पराओं को जीवित रखा है, जिनमें त्योहारों का विशेष महत्व है। ऐसा ही एक मनमोहक व्रत-त्योहार है छठ। जिसमें प्रकृति में सत्य के प्रतीक सूर्य की पूजा का विधान है। यह पर्व भारतीय […]

काशी सत्संग : ईश्वर सब देख रहा है

एक दिन की घटना है। एक छोटी सी लड़की फटे-पुराने कपड़ों में एक सड़क के कोने पर खड़ी भीख मांग रही थी। न तो उसके पास खाने को था, न ही पहनने के लिए। न ही उसे शिक्षा प्राप्त हो पा रही थी। वह बहुत ही गन्दी बनी हुई थी, कई दिनों से नहाई नहीं […]

“इश्क-ए-बनारस, पाक-ए-रमजान”

घुमड़ती गलियों में कदम-दर-कदम चला जा रहा था अनपढ़ मन खुद से सवाल-जवाब करते कि बनारस न होता, तो क्या होता? खुद का ही जवाब, ‘बनारस है, तो बनारसी हैं, मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारे हैं, धर्म से प्रेम और मजहब से मुहब्बत है, घण्ट-घड़ियाल-अजान और गुरुबाणी है। उधेड़बुन चल ही रही थी कि अनजाने में धक्का लगा और […]

काशी सत्संग: यूं टूटा कालीदास का अहं

अपार यश, प्रतिष्ठा और सम्मान पाकर एक बार कालिदास को अपनी विद्वत्ता का घमंड हो गया। उन्हें लगा कि उन्होंने विश्व का सारा ज्ञान प्राप्त कर लिया है और अब सीखने को कुछ बाकी नहीं बचा। उनसे बड़ा ज्ञानी संसार में कोई दूसरा नहीं। एक बार पड़ोसी राज्य से शास्त्रार्थ का निमंत्रण पाकर कालिदास महाराज […]

“अक्षय काशी, अक्षय तृतीया”

आज यानी 07 मई, मंगलवार अक्षय तृतीया है। ‘अक्षय’ शब्द का मतलब है- जिसका क्षय या नाश न हो। इस दिन किया हुआ जप, तप, ज्ञान तथा दान अक्षय फल देने वाला होता है अतः इसे ‘अक्षय तृतीया’ कहते हैं। अक्षय तृतीया के दिन काशी में भी अक्षय पुण्य फल कामना से स्नान-दान, नियम-संयम-व्रत का […]