दिहबे अरघिया घाट हम जाइके…

भारतीय संस्कृति अपनी विविधता और सप्तरंगों के कारण प्राचीन काल से ही विश्व को आकर्षित करती रही है। आज भी इसने अपनी परम्पराओं को जीवित रखा है, जिनमें त्योहारों का विशेष महत्व है। ऐसा ही एक मनमोहक व्रत-त्योहार है छठ। जिसमें प्रकृति में सत्य के प्रतीक सूर्य की पूजा का विधान है। यह पर्व भारतीय […]

काशी सत्संग : ईश्वर सब देख रहा है

एक दिन की घटना है। एक छोटी सी लड़की फटे-पुराने कपड़ों में एक सड़क के कोने पर खड़ी भीख मांग रही थी। न तो उसके पास खाने को था, न ही पहनने के लिए। न ही उसे शिक्षा प्राप्त हो पा रही थी। वह बहुत ही गन्दी बनी हुई थी, कई दिनों से नहाई नहीं […]

“इश्क-ए-बनारस, पाक-ए-रमजान”

घुमड़ती गलियों में कदम-दर-कदम चला जा रहा था अनपढ़ मन खुद से सवाल-जवाब करते कि बनारस न होता, तो क्या होता? खुद का ही जवाब, ‘बनारस है, तो बनारसी हैं, मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारे हैं, धर्म से प्रेम और मजहब से मुहब्बत है, घण्ट-घड़ियाल-अजान और गुरुबाणी है। उधेड़बुन चल ही रही थी कि अनजाने में धक्का लगा और […]

काशी सत्संग: यूं टूटा कालीदास का अहं

अपार यश, प्रतिष्ठा और सम्मान पाकर एक बार कालिदास को अपनी विद्वत्ता का घमंड हो गया। उन्हें लगा कि उन्होंने विश्व का सारा ज्ञान प्राप्त कर लिया है और अब सीखने को कुछ बाकी नहीं बचा। उनसे बड़ा ज्ञानी संसार में कोई दूसरा नहीं। एक बार पड़ोसी राज्य से शास्त्रार्थ का निमंत्रण पाकर कालिदास महाराज […]

“अक्षय काशी, अक्षय तृतीया”

आज यानी 07 मई, मंगलवार अक्षय तृतीया है। ‘अक्षय’ शब्द का मतलब है- जिसका क्षय या नाश न हो। इस दिन किया हुआ जप, तप, ज्ञान तथा दान अक्षय फल देने वाला होता है अतः इसे ‘अक्षय तृतीया’ कहते हैं। अक्षय तृतीया के दिन काशी में भी अक्षय पुण्य फल कामना से स्नान-दान, नियम-संयम-व्रत का […]

ये हैं होली से जुड़ी पौराणिक कहानियां

“प्रबल प्रेम के पाले पड़कर, प्रभू को नियम बदलते देखा। आपका मान टले टल जाये, पर भक्त का मान न टलते देखा।” भगवान के इस भाव को दर्शाने वाले रंगों के त्योहार होली की काशी पत्रिका की ओर से आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं। होली यानि रंगों का त्यौहार सिर्फ एक त्यौहार न होकर झूम उठने […]

रंग-ए-बनारस

हर रंग गुलिस्तां है हर रंग शरारा है ये रंग-ए-बनारस है ये रंग-ए-करारा है जी हां, यह बनारस ही है, जिसके रग-रग में कितने रंग हैं, किसी को नहीं पता। रंगों की मशहूर दुनिया भी शायद खुद को बनारस में पाकर अपना अस्तित्व भूल जाती है, तभी तो बनारस के शिव अपने बनारसियों में ही […]

काशी में ‛शिव’ की होली

भस्म और ‛गुलाल में सराबोर होंगे विश्वनाथ खान-पान, वार-त्यौहार…हर बात में जगत से भिन्न शिव की नगरी ‛काशी’ की ‛होली’ भी कुछ हटके ही है। रंगभरी एकादशी पर गौरी-शिव संग जमकर होली खेलने के बाद ही काशी में होली का हुड़दंग शुरू होता है। इतना ही नहीं रंगभरी एकादशी के ठीक दूसरे दिन बाबा भोलेनाथ […]

स्त्री ! तुम क्यों हो..?

भारत-पाकिस्तान, मोदी-राहुल, चुनाव, गठबंधन-राजनीति और जाने क्या-क्या.. दुनिया भर की कचर-पचर से त्रस्त यह अनपढ़ मन अरसे बाद आज कुछ लिखने को कुलबुलाया। हाथों में कलम लिए विचारों में शुमार अंतस की कुलबुलाहट शांत करने को विषय भी चाहिए था, सो हो लिए बनारस की यादों में गुम उसी बनारसी फक्कड़पन के वैचारिक गोद में। […]

महाशिवरात्रि : हर-हर बोल रहा है काशी

युग-युगांतर से भगवान भोलेनाथ की परमप्रिय काशी की थाती है महाशिवरात्रि। जी हां, यूं तो समूचा विश्व महाशिवरात्रि मनाता है, पर काशी की शिवरात्रि काशी के वासी बाबा विश्वनाथ को बेहद प्रिय है। अघोरी शिवगणों की बारात में दूल्हा बने विश्वनाथजी भस्म-भभूत से नहाए पथ पर बड़ी शान से देवी पार्वती का वरण करने निकलते […]