घुमक्कड़ साथी ‘अजंता-एलोरा की गुफाएं ‘

अजंता एलोरा की गुफाएं

भारत सदियों से अपनी अनूठी परम्पराओं और संस्कृति के लिए विश्व के कौतुहल का केंद्र रहा हैं। आज भी भारत ने अपनी सदियों पुरानी सस्कृति और रीती रिवाजों को बचा के रखा हैं। पर आज आपको आपका ये घुमक्कड़ साथी ले चलेगा एक ऐसे जगह पर जो भारतीय शिल्पियों की ख्वाबगाह हैं। तो आइये चलते हैं अपने अजंता एलोरा के सफर पर –

औरंगाबाद से लगभग १४० किमी की दूरी पर स्थित महाराष्ट्र की ये गुहाए न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के लिए कौतुहल का विषय हैं। २ शताब्दी ईसा पूर्व बनी ये गुफाएं अपने निर्माण से २००० वर्ष बाद भी जस की तस बनी हुई हैं और आने वाले अपने आगंतुकों को सहृदय अपनी शान-ओ-शौकत के दिन बड़े प्यार से बताती हैं।

गुफाएँ एक घने जंगल से घिरी, अश्व नाल आकार घाटी में अजंता गाँव से ३ १/३ कि॰मी॰ दूर बनी है। यह गाँव महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर से १४० कि॰मी॰ दूर बसा है। इसका निकटतम कस्बा है जलगाँव, जो ६० कि॰मी॰ दूर है, भुसावल ७० कि॰मी॰ दूर है। इस घाटी की तलहटी में पहाड़ी धारा वाघूर बहती है। यहाँ कुल 29 गुफाएँ (भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग द्वारा आधिकारिक गणनानुसार) हैं, जो कि नदी द्वारा निर्मित एक प्रपात के दक्षिण में स्थित है। इनकी नदी से ऊँचाई ३५ से ११० फीट तक की है।

अजंता की गुफाओं में जो चित्र मिलते है उनमे खास तौर पर एक अलग तरह की खूबसूरती है जो इशारे, मुद्रा और रूप के माध्यम से भावना प्रस्तुत करते हैं। ये बौद्ध धार्मिक कला की कृतियां हैं जिसने भारतीय कला को व्यापक तौर पर प्रभावित किया था। अजंता गुफाओं को इनके निर्माण के आधार पर दो समूहों में बांटा गया है जिसमे पहले समूह का निर्माण दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ है और दूसरा ऐसा समूह है जिसका निर्माण ४६० से ४८० ईसवी में हुआ। यह गुफाएं भारत के पुरातत्व विभाग की देखभाल में एक सरंक्षित जगह है। यूनेस्को ने भी इसे विश्व धरोहर स्थल की सूची में सूचीबद्ध किया है।

अजंता गुफाएं प्राचीन और अलग-अलग बौध परम्पराओं के प्राचीन मठो और पूजा की जगह के तौर पर परिभाषित होती है लेकिन इसके अलावा यह प्राचीन भारत के व्यापारियों और तीर्थयात्रा करने वालों के लिए आराम करने की जगह भी रही है। इसमें दूसरी शताब्दी और तीसरी शताब्दी ईसापूर्व में प्रचलित बौद्ध देवताओं के चित्र भी बहुतायत से मिलते है। अजंता गुफाएं प्राचीन भारतीय चित्रकला को सरंक्षित रखने वाली ऐसी कुछ ऐतिहासिक जगहों में से है जहाँ हम प्राचीन भारत की चित्रकला के बारे में बहुत कुछ जान सकते है क्योंकि इस बारे में जानकारी देने वाली कोई दूसरी ऐतिहासिक जगह नहीं है जो इस बारे में हमे सटीकता से कुछ बताती हो क्योंकि वो सब समय के साथ साथ नष्ट हो चुकी है।

अजंता गुफाओं के बारे में बहुत से उल्लेख मिलते है उन लोगो की किताबों में जिन्होंने मध्ययुगीन युग में भारत की यात्रा की थी और उनमे से कुछ चीनी बौद्ध यात्रियों के यात्रा उल्लेख महत्वपूर्ण है। सत्रहवीं शताब्दी के अकबर काल के युग में भी बहुत से लेखकों ने इस बारे में लिखा है।

एलोरा या एल्लोरा की गुफाओं को राष्ट्रकूट वंश के शासकों द्वारा बनवाया गया था। अपनी स्मारक गुफाओं के लिए प्रसिद्ध, एलोरा युनेस्को द्वारा घोषित एक विश्व धरोहर स्थल है। एलोरा भारतीय पाषाण शिल्प स्थापत्य कला का सार है, यहाँ ३४ “गुफ़ाएँ” हैं जो असल में एक ऊर्ध्वाधर खड़ी चरणाद्रि पर्वत का एक फ़लक है। इसमें हिन्दू, बौद्ध और जैन गुफ़ा मन्दिर बने हैं। ये पाँचवीं और दसवीं शताब्दी में बने थे। यहाँ १२ बौद्ध गुफ़ाएँ, १७ हिन्दू गुफ़ाएँ और ५ जैन गुफ़ाएँ हैं। ये सभी आस-पास बनीं हैं और अपने निर्माण काल की धार्मिक सौहार्द को दर्शाती हैं।

Post Author: kashipatrika

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