भोले भण्डारी- सप्त पाठ

उड़ गए तोते देश के राजनीतिक वांग्मय में अनादि काल से ही शकुन-अपशकुन, जादू-टोने, और टोटकों का बोलबाला रहा है। त्रेता युग के यशस्वी राजा राम भी इससे अछूते नहीं थे। रामायण में ढेरों ऐसे आख्यान हैं, जिनमें मुख्यतः बाई आँख का फड़फड़ाना, खाली घड़ों का मार्ग में मिलना इत्यादि है। अब जब प्रभु ही […]

भोले भण्डारी- षष्ठः पाठ

अंधेर नगरी, चौपट राजा “अपना देश बेशक महान है, सौ में से निन्यान्वे बईमान हैं…” ये फिल्मी डॉयलॉग देश और देशवासियों के साथ कुछ ऐसा चिपका है कि सालों से सत्ता परिवर्तन के बावजूद ईमानदारी की शीतल बयार देश में बहने का नाम ही नहीं ले रही है। अपने शासन के चरम पर किसी प्रधानमंत्री […]

भोले भण्डारी- पंचम पाठ

आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास देश में हर कोई अपने काम से असंतुष्ट है। रोजमर्रा की भागम-दौड़ और दो जून की रोटी कमाने में सभी के पसीने छूट जाते हैं। ऐसे में, जब हर तरफ देश की अव्यवस्था ने लोगों का जीना दूभर कर रखा है, केवल कुछ लोग इस धरातल पर […]