शायरों की दुनियाँ-‘इश्क़ में डूबता हूँ तो साँसे चलती हैं’

‘तुम बस मेरे लिखे को पढ़ लेना, मैं जान जाऊंगी के हममें कुछ तो बाक़ी है।’

‘शब्दों की दुनियां से हर कोई नहीं खोज लाता है मोती, ये काम कोई डूबता हुआ ही करता है।’
‘शायरी करते हैं के वो सामने जैसे बैठा हो,
चेहरा बनता है जिसका वो इश्क़ तुम्हारा है।
लौट जाओ तुम भी भले छोड़ कर,
मैं बैठा ही रहूँगा यादों के घरौंदे में।
उठ कर मर्ज़ी जाओ तो जाकर देखो,
लौट कर आना है, जब भी बुलाऊंगा।’

Post Author: Aditi

Loves to write and Paint. Cartoonist by heart and Content by nature

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