झूठ लिक्खा है सब किताबों में

तेरा सच है तेरे अजाबों* में,
झूठ लिक्खा है सब किताबों में।

एक से मिल के सब से मिल लीजिए,
आज हर शख्स है नकाबों में।

तेरा मिलना तिरा नहीं मिलना,
एक रास्ता कई सराबों* में।

उनकी नाकामियों को भी गिनिये,
जिनकी शोहरत है कामयाबों में।

रोशन थी सवाल की हद तक,
हर नजर खो गयी जवाबों में।
■ निदा फाजली
अजाबों = कष्टों
सराबों = मृगमरीचिकाओं

Post Author: Soni

काशी पत्रिका के जरिए हमारी भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता को सजोने-संवारने का सतत् प्रयास।

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