आपकी राशियां और नवरात्र

नवरात्रि माँ के अलग-अलग रूपों को याद करने और उत्सव मानाने का त्यौहार है। जैसे कोई शिशु अपनी मां के गर्भ में 9 महीने रहता है। वैसे ही, हम अपने आप में परा प्रकृति में रहकर- ध्यान में मग्न होकर आत्म की गहराई से माँ को याद करते हैं और देवी प्रसन्न होकर भक्तों पर सुख-समृद्धि और कृपा बरसाती हैं। इन दिनों यदि भक्तगण अपनी राशि के अनुसार देवी आराधना करेंगे, तो ग्रह दोषों के कारण जीवन में चल रही परेशानियों से भी मुक्ति मिल सकती है। 

मेष राशि
मेष राशि के जातक स्कन्द माता की पूजा करें और पूजा में लाल रंग के फूल अर्पित करें। इसके साथ है दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालिसा का पाठ करके मां का आशीर्वाद प्राप्त करें।

वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातक मां भगवती के महागौरी स्वरूप की पूजा करें और सुगंधित फूल अर्पित करें। इसके बाद ललिता सहस्त्रनाम और सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का पाठ अवश्य करें। अगर संभव हो तो माता के चरणों में चांदी का आभूषण अर्पित कर दें।

मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातक मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करें और कपूर से माता के दरबार में पूजा करें। पूजा के बाद ओम शिव शक्त्यै नम: मंत्र का 108 बार जप करें। इसके साथ ही हरी साड़ी का दान करें।

कर्क राशि
कर्क राशि के जातक इन नौ दिनो में शैलपुत्री मां की पूजा करें और लक्ष्मी सहस्त्रनाम का पाठ करें। माता को लाल व पीले फूल चढ़ाएं। मां वरद मुद्रा अभय दान प्रदान करती हैं।

सिंह राशि
सिंह राशि के जातक मां भगवती के कुष्मांडा स्वरूप की पूजा करें और मां को लाल फूल जरूर अर्पित करें। हर रोज दुर्गा सप्तशति का पाठ जरूर करें और मां के मंत्र की कम से कम 5 माला का जप अवश्य करें।

कन्या राशि
कन्या राशि के जातक नौ दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करें और माता को लाल फूल अर्पित करके 9 कन्याओं को लाल चुनरी दान में दें। आप हर रोज एक माला लक्ष्मी मंत्रों का जप और दुर्गा चालिसा का पाठ करें।

तुला राशि
तुला राशि के जातक महागौरी की पूजा-अराधना करें। साथ ही हर रोज मां काली या फिर दुर्गा सप्तशति के प्रथम चरित्र का पाठ करें। माता को पीले फूल अवश्य अर्पित करें।

वृश्चिक राशि
इस राशि के जातक माता स्कंदमाता की पूजा करें और हर रोज दुर्गा सप्तमी का पाठ करें। इसके साथ अड़हुल के पुष्प अर्पित करें।

धनु राशि
धनु राशि के जातक माता चंद्रघंटा की पूजा करें और श्रीरामरक्षा स्तोत्र का ब्रह्म मुहूर्त में पाठ करें। अगर संभव हो तो जरूरतमंद को अपने यहां खाना खिलाएं। ऐसा करने से माता का आप पर आशीर्वाद बना रहेगा।

मकर राशि
मकर राशि के जातक मां भगवती के कालरात्रि स्वरूप की पूजा करें और नर्वाण मंत्र का हर रोज सुबह-शाम जप करें। जो भक्त माता काली को प्रसन्न कर लेता है, उसे जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं होती है।

कुंभ राशि
कुंभ राशि के जातक कालरात्रि की पूजा करें और हर रोज देवी कवच का पाठ करें। माता हमेशा अपने भक्तों की मनोकामना पूरी करती है।

मीन राशि
मीन राशि के जातक मां सिद्धिदात्री की पूजा करें और बगलामुखी मंत्र का एक माला जप करें। आप हर रोज सुबह शाम दुर्गा सप्तशति का पाठ करें।

आज मां के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा

आज देवि चंद्रघंटा की पूजा होगी। ऐसी मान्यता है कि भगवती चंद्रघंटा की उपासना करने से भक्त आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त करता है। पूर्ण विधि से मां की उपासना करने वाले भक्त को संसार में यश, कीर्ति एवं सम्मान प्राप्त होता है। एक और मान्यता यह भी है कि माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना से भक्तों को सभी जन्मों के कष्टों और पापों से मुक्त मिलती है। मां अपने दोनों हाथों से साधकों को चिरायु, सुख सम्पदा और रोगों से मुक्त होने का वरदान देती हैं।

इन मंत्रों से करें पूजा –

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।

– ऊँ चं चं चं चंद्रघंटायेः ह्रीं नम:। इस मंत्र का 108 बार जाप करें।

माँ दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा विधि
माता की चौकी (बाजोट) पर माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसकेबाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें। चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टीके घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। इसके बाद पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारामां चंद्रघंटा सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधितद्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

ध्यान
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्।
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥

स्तोत्र पाठ
आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्।
अणिमादि सिध्दिदात्री चंद्रघटा प्रणमाभ्यम्॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टं मन्त्र स्वरूपणीम्।
धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यहम्॥
नानारूपधारिणी इच्छानयी ऐश्वर्यदायनीम्।
सौभाग्यारोग्यदायिनी चंद्रघंटप्रणमाभ्यहम्॥
■■

Post Author: Soni

काशी पत्रिका के जरिए हमारी भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता को सजोने-संवारने का सतत् प्रयास।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *