काशी सत्संग : नौकर को कोड़े!

पुराने समय की बात है। एक राजा के महल में उसके शयन कक्ष की सफाई करने वाला नौकर एक दिन राजा का बिस्तर ठीक कर रहा था। मुलायम बिस्तर को छूकर नौकर के मन में बिस्तर पर लेटकर देखने का लालच जागा। नौकर ने कक्ष के चारों और देख कर इत्मीनान कर लिया कि कोई देख तो नहीं रहा। जब वह आश्वस्त हो गया कि कोई उसे देख नहीं रहा है, तो वह थोड़ी देर के लिए बिस्तर पर लेट गया।
काम कर के थका-हारा नौकर बिस्तर पर लेटते ही गहरी नींद में चला गया। जैसे ही उसकी आंख लगी, कक्ष के बाहर से गुजर रहे प्रहरी की नजर नौकर पर पड़ी। नौकर को राजा के बिस्तर पर सोते देख प्रहरी की त्यौरियां चढ़ गयी,उसने तुरंत अन्य प्रहरियों को आवाज लगायी। सोते हुए नौकर को रस्सी से जकड़ लिया गया।
नौकर को राजा के दरबार में पेश किया गया और सारी बात बताई गई। उस नौकर की हिमाकत को सुनकर राजा की भवें तन गई और क्रोध में भरे राजा ने नौकर को 50 कोड़े लगाने की आज्ञा दी। भरी सभा में नौकर को कोड़े लगना शुरू हो गया, पर आश्चर्य हर कोड़ा लगने के बाद नौकर हंसने लगता। जब उसे 10-12 कोड़े लग चुके थे, तब भी नौकर हंसता ही जा रहा था। यह सब देखकर राजा के अचरच की सीमा नहीं रही। राजा ने कहा,‘ठहरो!!’
राजा ने नौकर से पूछा ‘यह बताओ कि कोड़े लगने पर, तो तुम्हें दर्द होना चाहिए, लेकिन फिर भी तुम हंस क्यों रहे हो?’
नौकर ने कहा ‘हुजूर, मुझे दर्द खूब हो रहा है, लेकिन मैं यह सोचकर हंस रहा हूं कि थोड़ी देर के लिए मैं आपके मुलायम बिस्तर पर सो गया, तो मुझे 50 कोड़े खाने पड़ रहे हैं। हुजूर, जो रोज इस बिस्तर पर सोता है, उसे उपरवाले के दरबार में कितने कोड़े लगाए जाएंगे।’
नौकर की बात सुनकर राजा अनुत्तरित रह गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने तुरंत उस नौकर को आजाद करने का हुक्म दे दिया।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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