काशी सत्संग: पवित्र स्पर्श से सुधरी सेहत

यह कहानी उन दिनों की है, जब विश्व युद्ध चल रहा था। ‘प्रिंस ऑफ वेल्स’ एडवर्ड अष्टम एक दिन युद्ध में घायल लोगों को देखने इंग्लैंड के एक निजी अस्पताल में पहुंचे। जब घायलों से मिलकर वे बाहर गेट पर आए, तो उन्होंने अस्पताल के अधिकारियों से कहा, ‘आप लोग तो घायलों की संख्या 36 बता रहे हैं, लेकिन मैंने तो 29 ही देखे हैं।’
अधिकारियों ने सफाई दी, ‘सर! उनकी हालत बहुत खराब है, इसलिए उन्हें आपको नहीं दिखाया गया।’ इस पर प्रिंस ने उन्हें देखने की जिद की। अंततः उन्हें घायलों के पास ले जाया गया। प्रिंस ने सभी से बातें कीं, स्नेहपूर्वक कुशल क्षेम पूछा और जल्द ही स्वस्थ्य होने की शुभकामना दी।
अचनाक उन्होने पूछा, ‘एक घायल अभी भी कम है।’ तब अस्पताल के अधीक्षक ने कहा, ‘उस मरीज की हालत बहुत खराब है वह न देख सकता है न ही बोल सकता है। उसकी मृत्यु कभी भी हो सकती है।’
प्रिंस ने कहा, ‘मैं उसे जरूर देखना चाहूंगा।’ राजा की इच्छा के आगे अधिकारी मजबूर थे। उन्हें घायल के पास ले जाया गया। प्रिंस के सामने यह दृश्य हृदय विदारक था।
प्रिंस ने उस व्यक्ति का माथा चूम लिया और उसके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। अस्पताल के सभी कर्मचारी यह देखकर दंग रह गए कि एक राजशाही परिवार का व्यक्ति इतने कोमल हृदय का हो सकता है। प्रिंस के स्पर्श ने उस पर जादू सा असर किया। कुछ दिनों बाद उस व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार आया और वह लंबे समय तक रहा। उस व्यक्ति को प्रिंस और वह व्यक्ति प्रिंस को ताउम्र याद रहे।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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