काशी सत्संग : सन्यासी और स्त्री

एक विदेशी महिला स्वामीजी के समीप आकर बोली, “मैं आपस विवाह करना चाहती हूं।” स्वामीजी बोले, “क्यों? मुझसे क्यों ? क्या आप जानती नहीं कि मैं एक सन्यासी हूं?” औरत बोली, “मैं आपके जैसा ही गौरवशाली, सुशील और तेजोमयी पुत्र चाहती हूं और वह तब ही संभव होगा। जब आप मुझसे विवाह करेंगे।”
स्वामीजी बोले, “हमारा विवाह तो संभव नहीं है परंतु, एक उपाय है।” औरत ने जिज्ञासु होकर पूछा- क्या? स्वामीजी ने उत्तर दिया,“ मैं ही आपका पुत्र बन जाता हूं। आज से आप मेरी मां बन जाएं। आपको मेरे रूप में मेरे जैसा पुत्र मिल जाएगा।”
यह सुनकर औरत स्वामीजी के चरणों में गिर गई और बोली कि आप साक्षात् ईश्वर के रूप है। इसे पुरुषार्थ कहते हैं, जो हर नारी के प्रति अपने अंदर मातृत्व की भावना उत्पन्न कर सके।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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