काशी सत्संग: डायरी के पन्ने

यह उस समय की बात है, जब डॉ.राजेन्द्र प्रसाद देश के राष्ट्रपति बन चुके थे। राजेन्द्र बाबू को डायरी लिखने की आदत थी। एक बार अपने जन्मदिन पर सवेरे उठते ही जब वे अपनी डायरी में कुछ लिखने बैठे, तो उन्होंने देखा कि उसके कुछ पन्ने फटे हुए है। उन्हें समझते देर न लगी कि यह उनके घर के बच्चों का काम है। उन्होंने सोचा कि क्यों न ऐसा कुछ किया जाए कि बच्चे स्वयं ही अपनी गलती मानें और खुद ही बताएं कि सच क्या है! राजेन्द्रबाबू बच्चों पर अपनी तरफ से कोई आरोप नहीं लगाना चाहते थे। उनका मानना था कि ऐसा करने से बच्चों में अपराध की प्रवृति पनप सकती है। वे सोचने लगे कि आखिर बच्चों से इस बारे में किस तरीके से बात की जाए। कुछ देर सोचनेे के बाद उन्हें एक उपाय सूझ ही गया। उन्होंने बच्चों को अपने पास बुलाकर कहा,’जिस बच्चे ने इसके पन्ने फाड़े हैं, उसे उतने ही पैसे इनाम में दिए जाएंगे।’
पैसों की बात सुनकर सभी बच्चे बहुत खुश हुए और निर्भय होकर सभी ने पन्ने फाड़ने की बात बता दी। राजेन्द्रप्रसाद ने सब बच्चों को सुंदर इनाम भी दिए और यह भी समझाया कि डायरी या किताब के पन्ने फाड़ना अच्छी बात नहीं है। उसमें लिखी हुई अनेक अमूल्य बातों से हम वंचित हो जाते है और जब समय पर हमें जरूरी चीज नहीं मिलती तो हमें अपने किए पर पछताना पड़ता है। अब सारी बात बच्चों की समझ में आ चुकी थी। उन्होंने खुश होकर राजेन्द्र बाबू से वादा किया कि वे फिर ऐसी गलती कभी नहीं करेंगे।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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