काशी सत्संग : हीरे की अंगूठी

एक अमीर आदमी के बहुत सारे मित्र थे, लेकिन उनमें से एक मित्र जो काफी गरीब था, वह उसका विश्वासपात्र था। एक दिन अमीर आदमी ने अपने घर सभी मित्रों को अपने घर भोजन पर आमंत्रित किया। भोजन के बाद अमीर आदमी को ख्याल आया है कि उसकी अंगुली में जो हीरे की अंगूठी थी, वह कहीं गिर गई है। जब यह बात उसने अपने मित्रों से कही, तो सबने मिलकर अंगूठी को बहुत तलाशा, पर वह नहीं मिली। एक मित्र ने कहा, “आप हम सभी की तलाशी ले सकते हैं, ताकि आपके मन में हमारे प्रति अविश्वास न आए…!!”
बाकी सभी मित्र भी इससे सहमत हो गए, लेकिन वह गरीब मित्र तलाशी देने के लिए राजी नहीं हुआ। इस पर अन्य मित्रों ने उसे अपमानित किया, पर अमीर आदमी ने किसी की तलाशी ना लेकर सभी को सम्मान विदा कर दिया।
दूसरे दिन सुबह जब उसने अपनी कोट के जेब में हाथ डाला है, तो अंगूठी मिल गई। वो सीधा गरीब मित्र के घर पहुंचा और उससे रात वाली घटना की माफी मांगते हुए, अपनी तलाशी न देने की वजह पूछी। गरीब मित्र ने पलंग पर लेते अपने बीमार पुत्र की ओर इशारा करते हुए कहता है, “मैंजब आपके यहां भोजन करने आ रहा था, इसने मिठाई खाने की जिद की थी। आपके यहां जब मेरे भोजन की थाली में मिठाई मिली, तो उसे न खाकर मैंने पुत्र के लिए जेब में रख ली। अगर तलाशी ली जाती, तो मैं मिठाई चोर समझ लिया जाता। ऊपर से पुत्र का भी अपमान होता।” यह सुनकर अमीर आदमी की आंखें भर आई।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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