काशी सत्संग: सच्चा सम्मान

एक वृद्ध मां रात के 11:30 बजे रसोई में बर्तन साफ कर रही थी, तभी घर में मौजूद दो बहुएं अपने पति से इस बात की शिकायत करने लगीं। बहुओं ने पति से कहा- ‘मां को मना करो, इतनी रात को बर्तन धोने की वजह से हमारी नींद खराब होती है। सुबह 4 बजे उठकर वे फिर खट्टर-पट्टर शुरू कर देती हैं। सुबह 5 बजे पूजा-पाठ करके हमें सोने नही देतीं और रात को यह सब।’
यह सब सुनकर दोनों बेटे अपने-अपने कमरे से बाहर आते हैं और रसोई में जाकर बर्तन साफ करने में मां की मदद करने लगते हैं। काम खत्म कर दोनों भाई मां को बड़े प्यार से उसके कमरे में ले जाते है। तो देखते हैं पिताजी भी जागे हुए हैं।
दोनो भाई मां को बिस्तर पर बैठा कर कहते हैं, ‘मां हमें भी सुबह जल्दी उठा देना, हमें भी पूजा करनी है और सुबह पिताजी के साथ योगा भी करेंगे।’
उस दिन से दोनों बेटे सुबह जल्दी उठकर मां-पिताजी के साथ पूजा-पाठ व योगा करते और रात को मां के साथ रसोई का काम करते। यह देख पत्नियां बोलीं, ‘माता जी करती तो हैं, आप क्यों कर रहे हैं?’
दोनों बेटों ने बड़े प्यार से अपनी पत्नियों से कहा,’ हमने शादी की तो सोचा कि तुम हमारी मां को अपनी मां समझ कर रहोगी और घर के काम की जिम्मेदारी बांट लोगी, पर तुम लोग ये कार्य नहीं कर रही हो। कोई बात नहीं, हम ही अपनी मां की सहायता कर देते हैं।’
पत्नियों को बात समझ आ गई। अगले कुछ दिनों में ही पूरे घर का वातावरण बदल गया। अब बहुएं घर के काम जल्दी-जल्दी खत्म कर लेतीं और सुबह जल्दी जग कर पूजा भी करने लगीं।
मित्रों, सार यह है कि यदि बेटा अपनी मां को पूरा सम्मान देगा, तो बहुएं भी इस बात को समझ कर उनकी सेवा करेंगी।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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