काशी सत्संग : तीन सहारे

एक समय की बात है, एक धर्मपरायण और न्यायप्रिय शासक थे, जो वेश बदलकर अपनी प्रजा का हालचाल जानते रहते थे। एक दिन उन्हें पता चला कि उनके राज्य में रहने वाली एक महिला का पति गलत संगति में पड़ गया है और इससे नाराज होकर महिला ने अकेले रहना शुरू कर दिया है। महिला के पास रोजगार का कोई नियमित साधन नहीं था, इसलिए उसका जीवन बेहद कठिनाई में बीत रहा था। राजा वेश बदलकर उस महिला के पास पहुंचे। उन्होंने कहा, ‘देवी, आप अत्यंत कठिनाई में अपना जीवन गुजार रही हैं। क्या आप बिल्कुल बेसहारा हैं?’ यह सुनकर स्त्री चौंककर बोली, ‘आपसे किसने कहा कि मैं बेसहारा हूं।’ इस पर राजा बोले, ‘पर आप रहती, तो अकेली हैं।’ महिला बोली, ‘अकेले रहने का यह अर्थ नहीं है कि मैं बेसहारा हूं। मेरे तो तीन-तीन सहारे हैं।’
यह सुनकर राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ, उसने पूछा, ‘आपके तीन सहारे कौन हैं? क्या मैं उनका नाम जान सकता हूं।’ महिला बोली, ‛मेरे दोनों हाथ, मेरा धर्म और मेरा ईश्वर मेरा सहारा है। अब आप ही बताइए जिस महिला के पास जगत के सबसे बड़े सहारे मौजूद हों, भला वह बेसहारा कैसे हो सकती है?’ महिला के इस जवाब ने राजा को निरुत्तर कर दिया।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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