काशी सत्संग : बावला ऊंट

एक गांव में एक बढ़ई रहता था । वह अपनी सुस्ती के कारण वह बहुत गरीब था । उसके सारे साथी अमीर हो गए थे । जिन्हें देख-देखकर वह जलता । दुखी होकर एक दिन वह अपना गांव छोड़ कर दूसरे किसी शहर की ओर चल दिया ।
रास्ते में उसने एक ऊंटनी देखी जो अपने साथियों से बिछुड़ गई थी। उसने जैसे ही इस बच्चे वाली सुन्दर ऊंटनी को देखा बहुत खुश हुआ । उसे पाकर वह फिर अपने घर लौट गया और घर आकर उसने ऊंटनी को बांध दिया और स्वयं उसके लिए खाने का चारा लेने के लिए चल पड़ा। बस इस प्रकार से वह बढ़ई काम पर लग गया । ऊंटनी की सेवा करता, उसके दूध से सारा परिवार आनंद लेता । धीरे-धीरे ऊंटनी भी मोटी होती गई, उसका बच्चा भी बड़ा होकर ऊंट बन गया । बढ़ई ने खुशी से उस ऊंट के गले में एक घंटा बांध दिया था । जब से इस घर में ऊंटनी आई थी, तब से इस बढ़ई के दिन फिर गए थे।
उसने अपनी पत्नी से कहा कि क्यों न मैं वन में जाकर ऊंट के बच्चे ले आऊं, फिर उन्हें बड़े करके हम बेचेंगे । इससे हम बहुत धन कमा लेंगे । उसकी पत्नी भी खुश हो गई ।
बढ़ई अपनी पत्नी से कुछ धन ले और थोड़ा कर्जा बनिए से लेकर ऊंटनी के बच्चे खरीद लाया । इस तरह उसके पास बहुत से ऊँट-ऊंटनियों हो गई । उनकी सेवा के लिए उसने एक नौकर भी रख लिया । इस तरह बढ़ई उनके व्यापार से अमीर बन गया ।
ऊंट परिवार रोजाना ही वन में जाकर हरे-हरे पत्ते खाकर अपना पेट भरता था। जो पहले ऊंट का बच्चा था,वह अपने आप को सबसे बड़ा समझते हुए अकड़ में रहता और सबसे अलग जंगल में घूमता रहता। उन सब साथियों ने कहा कि भाई तुम्हारे गले में घंटा बंधा है,तुम हमारे साथ ही रहा करो, कहीं ऐसा ना हो कि तुम्हें कोई जंगली जानवर खा जाए। लेकिन वह अपनी ही अकड़ में था उसने किसी की बात नहीं मानी।
एक दिन जैसे ही यह है ऊंटों का झुंड जंगली तालाब में से पानी पीकर निकला, तो एक शेर ने अपना दांव मारा। सब ऊंट आगे निकल गए,घंटे वाला ऊंट बड़े मजे से अकड़ा हुआ, उनके पीछे -पीछे चल रहा था। बस, फिर क्या था, शेर ने उस अकेले ऊंट को देखते ही उसे झपट लिया। ऊंट मारा गया। मित्रों, अच्छी सलाह पर विचार न कर, अपनी मनमानी चलाने वालों को पछताना पड़ता है।
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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