काशी सत्संग: कहां हैं भगवान!

एक आदमी हमेशा की तरह उसी नाई की दुकान पर बाल कटवाने गया। हमेशा की तरह बात काटते हुए ग्राहक और नाई के बीच विविध विषयों पर चर्चा हो रही थी। इस बीच ईश्वर के अस्तित्व को लेकर भी बात उठी।
नाई ने कहा- भैया, मैं आपकी तरह भगवान के अस्तित्व में आस्था नहीं रखता।”
आदमी ने पूछा- तुम ऐसा क्यों कहते हो? इस पर नाई तपाक से बोला- “अरे, ये समझना बहुत आसान है। आप बस गली में जाइए और आप समझ जाएंगे कि भगवान नहीं हैं। अगर भगवान होते तो क्या इतने लोग बीमार होते? इतने बच्चे अनाथ होते! भगवान होते तो किसी इंसान को कोई दर्द, कोई तकलीफ कैसे होता! नाई ने बोलना जारी रखा, “मैं ऐसे भगवान के बारे में नहीं सोच सकता जो इन सब चीजों को होने दे। आप ही बताइए कहां हैं भगवान?”
आदमी ने एक क्षण के लिए कुछ सोचा, पर बहस आगे न बढ़े इसलिए चुप ही रहा।
नाई ने अपना काम खत्म किया और आदमी कुछ सोचते हुए दुकान से बाहर निकला। वह दुकान से कुछ दूर जाकर खड़ा हो गया। कुछ देर इंतजार करने के बाद उसे एक लंबी दाढ़ी-मूंछ वाला अधेड़ व्यक्ति उस तरफ आता दिखाई पड़ा। उसे देखकर लगता था मानो वो कितने ही दिनों से नहाया-धोया न हो। आदमी तुरंत नाई की दुकान में वापस घुस गया और बोला, “जानते हो, इस दुनिया में नाई नहीं होते!”
“भला कैसे नहीं होते हैं? ”- नाई ने सवाल किया, “मैं तुम्हारे सामने इसका प्रमाण हूं!!”
अब आदमी ने कहा- वो नहीं होते हैं, वरना किसी की भी लंबी दाढ़ी-मूंछ नहीं होती। वो देखो सामने उस आदमी की कितनी लंबी दाढ़ी-मूंछ है!!”
“अरे नहीं साहब, नाई होते हैं, लेकिन बहुत से लोग हमारे पास नहीं आते।” नाई बोला।
“बिलकुल सही”, आदमी ने नाई को रोकते हुए कहा- यही तो बात है, भगवान भी होते हैं, पर लोग उनके पास नहीं जाते। और ना ही उन्हें खोजने का प्रयास करते हैं, इसीलिए दुनिया में इतना दुख- दर्द है।”
ऊं तत्सत…

Post Author: Soni

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