काशी सत्संग : हीरे की अंगूठी

एक अमीर आदमी के बहुत सारे मित्र थे, लेकिन उनमें से एक मित्र जो काफी गरीब था, वह उसका विश्वासपात्र था। एक दिन अमीर आदमी ने अपने घर सभी मित्रों को अपने घर भोजन पर आमंत्रित किया। भोजन के बाद अमीर आदमी को ख्याल आया है कि उसकी अंगुली में जो हीरे की अंगूठी थी, […]

काशी सत्संग : पांच पत्थर

एक चोर अक्सर एक साधु के पास आता और उससे ईश्वर से साक्षात्कार का उपाय पूछा करता था। साधु हमेशा उसकी बात टाल देते, लेकिन चोर पर इसका असर नहीं पड़ता था। वह रोज उपाय जानने के लिए साधु के पास आ जाता था।एक दिन साधु ने कहा, ‘तुम्हें सिर पर कुछ पत्थर रखकर पहाड़ […]

काशी सत्संग : तीन सहारे

एक समय की बात है, एक धर्मपरायण और न्यायप्रिय शासक थे, जो वेश बदलकर अपनी प्रजा का हालचाल जानते रहते थे। एक दिन उन्हें पता चला कि उनके राज्य में रहने वाली एक महिला का पति गलत संगति में पड़ गया है और इससे नाराज होकर महिला ने अकेले रहना शुरू कर दिया है। महिला […]

काशी सत्संग : विष समान अमृत

सिकंदर उस जल की तलाश में था, जिसे पीने से अमर हो जाते हैं। दुनियाभर को जीतने के जो उसने आयोजन किए, अमृत की तलाश के लिए ही थे। काफी दिनों तक देश-दुनिया में भटकने के पश्चात आखिरकार सिकंदर ने वह जगह पा ही ली, जहां उसे अमृत की प्राप्ति होती।वह उस गुफा में प्रवेश […]

काशी सत्संग : शीशमहल

एक दिन एक शिष्य ने गुरु से पूछा, ‘गुरुदेव, आपकी दृष्टि में यह संसार क्या है?’ इस पर गुरु ने एक कथा सुनाई।‘एक नगर में एक शीशमहल था। महल की हरेक दीवार पर सैंकड़ों शीशे जड़े हुए थे। एक दिन एक गुस्सैल कुत्ता महल में घुस गया। महल के भीतर उसे सैंकड़ों कुत्ते दिखे, जो […]

काशी सत्संग : करुणामय करुणानिधि

एक बार प्रभु श्रीराम और भ्राता लक्ष्मण एक सरोवर में स्नान के लिए उतरे। उतरते समय उन्होंने अपने-अपने धनुष बाहर तट पर गाड़ दिए। जब वे स्नान करके बाहर निकले, तो लक्ष्मणजी ने देखा कि उनकी धनुष की नोक पर रक्त लगा हुआ था। उन्होंने श्रीराम से कहा, “भ्राताश्री! लगता है कि अनभिज्ञता में कोई […]

काशी सत्संग : तीन चावल

राजा गोपीचंद का मन गुरु गोरखनाथ के उपदेश सुनकर सांसारिकता से उदासीन हो गया। मां से अनुमति लेकर गोपीचंद साधु बन गए। साधु बनने के बहुत दिन बाद एक बार वह अपने राज्य लौटे और भिक्षापात्र लेकर अपने महल में भिक्षा के लिए आवाज लगाई। आवाज सुन उनकी मां भिक्षा देने के लिए महल से […]

काशी सत्संग : राम नाम का प्रताप

एक पहुंचे हुए महात्माजी थे। उनके पास एक शिष्य भी रहता था। एक बार महात्माजी कहीं गए हुए थे, उस दौरान एक व्यक्ति आश्रम में आया। आगंतुक ने कहा- मेरा पुत्र बहुत बीमार है। इसे ठीक करने का उपाय पूछने आया हूं।शिष्य ने बताया कि महात्माजी तो नहीं हैं, आप कल आइए। आगंतुक बहुत दूर […]

महादेव की महाशिवरात्रि

कहते हैं काशी के कण-कण में शिव हैं, ऐसे में यदि देवाधिदेव महादेव के भक्तों को इस साल महाशिवरात्रि के मौके पर बाबा विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति न भी हो, तो भी भोलेनाथ श्रद्धालुओं के अंगसंग हैं। यूं भी शिव के लिए समूचा संसार ही शिवालय है, ऐसे में उनकी प्रिय […]

काशी सत्संग : प्रेम

एक औरत ने तीन संतों को घर के सामने देखा और उन्हें भोजन के लिए आमंत्रित किया। संत बोले, ‘हम सब किसी भी घर में एक साथ नहीं जाते। मेरा नाम ‘धन’ है। इन दोनों के नाम ‘सफलता’ और ‘प्रेम’ हैं। हममें से कोई एक ही भीतर आ सकता है। आप घर के अन्य सदस्यों […]